महाशिवरात्रि का महत्व (Mahashivratri 2025 Significance)
शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि का ही वो दिन था, जब भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती विवाह के बंधन में बंधे थे. महाशिवरात्रि पर ही भगवान ने माता पार्वती से विवाह कर गृहस्थ जीवन में कदम रखा था. शिव और शक्ति पूरक है एक-दूसरे के. अर्धनारीश्वर रूप में भगवान शिव ने मां गौरी को बराबरी का दर्जा दिया. जीवन के सभी क्षेत्रों में सभी के साथ समान व्यवहार, जीवन को सम्पूर्ण सुखी बनाता है. भोलेनाथ हमें वर्तमान में जीना, भविष्य के लिए योजनाएं बनाना और अतीत में से अनुभव सीखना बताते हैं.
शिव पुराण में बताया गया है जो भी इस दिन व्रत कर भोलेनाथ की पूजा करते है, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. साथ ही उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. वैसे तो भोलेनाथ इतने भोले है कि छोटी-छोटी चीजों से भी खुश हो जाते है और ना ही इनकी पूजा करने में बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत पड़ती है. इस दिन विधि-विधान से पूजा-आराधना करने वालों को धन, सौभाग्य, समृद्धि, संतान और आरोग्य की प्राप्ति होती है. ये दिन धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरूषार्थों की प्राप्ति के लिए विशेष है, क्योंकि भोलेनाथ भोले बनकर सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करते है.
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