Uttarkashi: गंगोत्री रेंज के समीप दिखा दुर्लभ हिम तेंदुआ, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी से जमे नदी नाले ।




गंगोत्री रेंज में झाला के समीप दुर्लभ हिम तेंदुआ दिखा। वहीं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी से नदी नाले जम गए हैं।

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अच्छी बर्फबारी होने से नदी नाले जम गए हैं। इसलिए दुर्लभ वन्यजीव 2500 से 3000 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दिखने लगे हैं। सोमवार को गंगोत्री रेंज में हर्षिल घाटी के झाला गांव के समीप पहाड़ी पर दुर्लभ हिम तेंदुआ बर्फ के बीच घूमता हुआ दिखा।स्थानीय लोगों ने इसका वीडियो भी बनाया है।

स्थानीय युवा धीरज रावत ने बताया कि इन दिनों क्षेत्र में आवाजाही कम होने के कारण स्नो लेपर्ड बहुत देर तक झाला के आसपास घूमता रहा। उसके बाद वह उच्च हिमालयी क्षेत्र की ओर चला गया। गंगोत्री रेंज के रेंज अधिकारी यशवंत चौहान ने कहा कि दुर्लभ हिम तेंदुआ समुद्रतल से 3500 से 4000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर रहते हैं।

इन दिनों ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पानी की कमी के कारण दुर्लभ वन्यजीव भरल निचले इलाकों की ओर आते हैं। इसलिए कई बार हिम तेंदुआ भी इनके पीछे निचले क्षेत्रों में आ जाते हैं। क्योंकि भरल हिम तेंदुओं का मुख्य भोजन होता है। करीब चार वर्ष पूर्व भी झाला के समीप हिम तेंदुआ का एक बच्चा दिखा था।


  • संख्या में वृद्धि: 'स्टेटस ऑफ स्नो लेपर्ड इन इंडिया (SPAI) रिपोर्ट' के अनुसार, उत्तराखंड में अब 124 हिम तेंदुए मौजूद हैं, जो लद्दाख के बाद देश में दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह प्रभावी संरक्षण प्रयासों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी का नतीजा है। यह वृद्धि वन विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
  • भारत का पहला संरक्षण केंद्र: उत्तरकाशी जिले के भैरोंघाटी में स्थापित किया जा रहा भारत का पहला हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र, वन विभाग की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। यह केंद्र न केवल इन तेंदुओं के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करेगा, बल्कि इनके व्यवहार, पारिस्थितिकी और संरक्षण रणनीतियों पर शोध का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। विभाग को उम्मीद है कि यह केंद्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित करेगा।
  • समुदाय आधारित संरक्षण: वन विभाग उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों, विशेषकर 'वन गुर्जर' और 'भोटिया' समुदाय के साथ मिलकर काम कर रहा है। इन समुदायों को हिम तेंदुए संरक्षण कार्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके और स्थानीय लोग संरक्षण के भागीदार बनें। जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं।
  • पर्यटन और अर्थ-व्यवस्था को बढ़ावा: हिम तेंदुओं की बढ़ती संख्या और संरक्षण के प्रयास राज्य में वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहे हैं। वन विभाग द्वारा नियंत्रित 'गोविंद पशु विहार नेशनल पार्क' और 'गंगोत्री नेशनल पार्क' जैसे क्षेत्र अब वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए प्रमुख आकर्षण बन गए हैं। इससे स्थानीय अर्थ-व्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है, जबकि पर्यावरण संतुलन बनाए रखना वन विभाग की प्राथमिकता है।

VIVEK DOBHAL

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