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Uttarakhand (Mungarsanti 22 Village Migration Report) Palayan Ayog Report 2023





Uttarakhand Palayan Ayog Report 2023 

रवाईं मुंगरसन्ती बरनीगाड़ से कफनोल के अंतर्गत आने वाले गांव की पलायन रिपोर्ट-2023

(Rawanyi Mungarsanti 22 Village Migration Report 2023)
#इस रिपोर्ट का आधार :- क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की कमी को देखते हुए, लोग शहरों की तरफ जा रहे हैं, ये रिपोर्ट इस आधार पर तैयार की गई है ।

उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्रों से हो रहा पलायन एक गंभीर समस्या है । अगर बात की जाय वर्ष 2001 से 2011 तक तो उत्तराखंड में जनसंख्या बहुत धीमी गति से वृद्धि देखी गयी है ।
वर्ष 2001 से 2011 के बीच अल्मोड़ा और पौड़ी में काफी ज्यादा पलायन देखा गया है ।

प्रायः देखा गया है कि देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल आदि जगह की जनसंख्या में वृध्दि हुई है। 

नोट:- उत्तराखंड सरकार ने पलायन की समस्या के सभी पहलुओं की जांच करने के लिए अगस्त 2017 में पलायन आयोग का गठन किया है, जो राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के केंद्रित विकास के लिए एक दृष्टिकोण विकसित करेगा और राज्य स्तरों पर सरकार को विभिन्न अन्य सम्बंधित मामलों को भी प्रस्तुत करेगा ।
अगर बात की जाए नौगांव ब्लॉक के बरनीगाड़ से कफनोल के अंतर्गत बसे 22 गांव की तो इस क्षेत्र में भी पलायन अपनी स्थिति में बरकरार है, ऐसे में यदि ये सिलसिला जारी रहा तो ये क्षेत्र भी पौड़ी की तरह हो जाएगा ।

पलायन के मुख्य कारण पर एक नजर :-
  • रोजगार का न होना ।
  • कृषि भूमि की कमी ।
  • शिक्षा (निम्न एवम उच्च) ।
  • स्वास्थ्य उपचार हेतु अस्पताल की कमी ।
  • यातायात की कमी ।
  • उच्च तकनीकी की कमी ।
  • जल की कमी (अभी शुरू हुई) ।
  • महंगाई ।
  • नजदीकी गांव से मुख्य बाजार की दूरी ।
  • स्वरोजगार के अवसर जुटाने के लिए संसाधनों की कमी।
  •  गरीबी ।
  • विकास की कमी ।
  • बैंक की कमी ।

बरनीगाड़ से कफनोल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 22 गाँव की पलायन रिपोर्ट 2023 :- शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार 


 गाँव का नाम

 जनसंख्या

 पलायन %

 कफनोल

 1600

 20 - 22 %

 थोलिंका

 480

 15 - 18 %

 दारसों

 505

 14-16 %

 हिमरोल

 400

 15-20 %

 गैर

 406

 7-9 %

 कलोगी

 540

 8 - 9 %

 धारी पल्ली

 530

 20 - 25 %

 तियाँ

 660

 20 - 22 %

 मानड़गांव

 305

 15 - 20 %

 नरयुनका

 235

 13 - 14 %

 बजलाड़ी

 330

 10 - 12 %

 पमाड़ी

 356

 13 - 14 %

 खाबला

 290

 7 - 8 %

 सिमलसारी

 307

 5 - 7 %

 कसलाना+सराणा

 390

 7 - 8 %

 देवल

 300

 10 - 12 %

 न्यूडी

 208

 1 - 2 %

 बौन्ति

 400

 5 - 10 %

 चोपड़ा

 500

 10 - 12 %

 बिजोरी

 190

 8 - 10 %

 पालुका

 103

 60 - 70 %

 संगोली

 70

 3 - 5 %

 कुल - 22

 कुल - 9005

 


पालुका गांव का पलायन अधिक है, अगर जनसंख्या के आधार पर देखा जाए ।

उपरोक्त आंकड़ों के अनुसार पलायन धीमी गति से बढ़ रहा है, आने वाले समय में अगर हम इस विषय को गंभीरता से नही लेंगें तो आने वाले समय मे हमारा क्षेत्र भी पौड़ी की गांव की तरह हो जाएंगे "वीरान" ।


पलायन पर विचार विमर्श :- 

1. क्या पलायन जरूरी है ।

पलायन जरूरी तो नही है, लेकिन इंसान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान जाता है, और वहीं का रह जाता है, जब वह वापस अपने जन्मभूमि में नही लौटता, और वहीं का रह जाता है, जहां वह कार्य करने के लिए गया है, तब उस परिघटना को पलायन से जोड़ सकते है । हमे अपनी मातृभूमि को नही छोड़ना चाहिए प्रायः एक संस्कृत श्लोक है जिसमे कहा गया है कि माता और जन्मभूमि का सम्मान तो स्वर्ग से भी ऊपर है ।

श्लोक:- "मित्राणि धन धान्यानि प्रजानां सम्मतानिव । जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" ॥ 

2. क्या पलायन को रोका जा सकता है ।

हाँ रोका जा सकता है, ये केवल एक के बस में नही हम सब लोगों को एक दूसरे का साथ देकर इसको रोका जा सकता है, हमे स्वरोजगार पर भी ध्यान देना चाहिए बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए हमें अपने कृषि, आदि के विषय पर ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि लोग पैसा कितना भी क्यों न कमा लें खायेगा तो भोजन ही इसलिए अगर हम कृषि में या बागवानी, पर्यटन में कुछ नया करें तो अच्छा पैसा कमा सकते है । दूसरा हम  अपने पहाड़ी हर्बल या दाल, चावल, या अन्य चीजों को ब्रांड बनाकर देश विदेश में भी बेच सकते है इसमें भी अच्छा पैसा कमाया जा सकता है ।

3. सरकार पलायन के लिए क्या कर रही है ।

वर्तमान समय मे सभी को सरकारी नौकरी मिल पाना सम्भव नही है, उस परिस्थिति में सरकार के पास राजस्व भी नही है फिर सरकार के द्वारा ग्राम स्तर पर छोटे छोटे कुटीर उद्योग, डेरी उद्योग, बागवानी, यातायात के लिए बैंकों से सस्ती दर पर लोन मुहैया करवा रही है, और लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जिससे धन अर्जित किया जा सकता है ।

  • पिछले 10 वर्षों की रिपोर्ट देखें तो पता चलता है कि नौगांव ब्लॉक में केवल 2 गांव ही ऐसे है जहां लोग आकर बसे है, जो पलायन रोकने में प्रतिशत के आधार पर देखा जाए तो नगण्य है ।
 रिपोर्ट पलायन आयोग 2008-2018 👇👇


क्षेत्र के क्षेत्रीय विशेषज्ञों से वार्तालाप करने पर कुछ बातें सामने आईं है ।


श्री पंकज डोभाल
(Sr. Manager Program
SUVIDHA) :- 

रोजगार:- पलायन का मुख्य कारण रोजगार की अनुपलब्धता है । गांव में रोजगार के स्थायी साधन उपलब्ध नही है, सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नही उठा रही है, न ही सरकार की ओर से कोई अच्छी कार्यनीति है ।

शिक्षा :- पलायन का दूसरा सबसे बड़ा कारण शिक्षा और शिक्षा की समुचित व्यवस्था का  न होना । केवल प्रारंभिक शिक्षा को आधार मानकर मैं इस बात को नही बोल रहा हूँ अपितु मुझे लगता है कि 12 वीं के बाद शायद ही कोई शिक्षार्थी होगा जो शिक्षा के लिए मजबूरन बड़कोट या देहरादून न जाता हो, अथार्थ पलायित होना । 



श्री विजय डोभाल (अध्यापक) :- 1-  पलायन का सर्वाधिक जो मुख्य कारण मुझे लगता है वह आज के वर्तमान समय की सोच ।  जो सोच आज हमारे नौजवान युवा बनाकर चल रहे हैं कि " कुछ नहीं रखा है पहाड़ में " सब कुछ तो मैदानी क्षेत्रों में है । पलायन का जो कारण लोग मुख्यता रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य मानते हैं वह सब उन्हें मैदानी क्षेत्रों में दिखता है जबकि वास्तविक रुप से वह यह सोच को धारणा बना लेते हैं और अपने क्षेत्र से विमुख होकर मैदानी तरफ रुख करते हैं यह एक आम जनमानस की सोच है जो कि कहीं ना कहीं हम सब को कष्ट या पीड़ा पहुंचाती है । 
2 -  अगर मैं अपने क्षेत्र विशेष की बात करुं तो रोजगार लोगों को मैदानी क्षेत्र में दिखाई देता है जबकि अगर देखा जाए तो हम पहाड़ी बहुत मेहनती होते हैं तो क्यों ना ऐसी सोच पैदा करें कि हम अपने पहाड़ों में रोजगार के अवसरों को खोजें । सब कुछ सरकार पर निर्भर रहना शायद यह भी पलायन को नहीं रोक सकता और सरकार का क्या है यह तो जिसकी भी होगी अपने राजनीतिक स्वार्थ के अनुरूप कार्य करेगी इस पर ज्यादा चर्चा करना शायद समय की बर्बादी समझूंगा । इसलिए मैं व्यक्ति को सकारात्मक दृष्टिकोणवादी मानकर अपने लिए कुछ नया, जीवन के लिए कुछ नई सोच को खोज करना, यह सब मानता हूं और वह जो सोच यदि हम सब नौजवान युवा पहाड़ के अंदर विकसित कर पाए तो शायद पलायन को रोका जा सकता है । 

3 - तीसरा मुख्य कारण जो मुझे लगता है वह है अपनापन या अपनी माटी से लगाव । माना किसी बच्चे का जन्म पहाड़ की माटी पर ही ना हुआ हो तो उसे यह लगाव, अपनापन अपनी भूमि से कैसे होगा मेरे समझ से परे है क्योंकि उसने तो चकाचौंध भरी जिंदगी शहरों में देखी है वही पैदा हुआ वही बढ़कर आगे बढ़ा, वहीं की सुखद जिन्दगी उसने देखी फिर वह क्यों पहाड़ों की ओर रुख करेगा । जिस प्रकार भारत जैसा महान देश छोड़कर लोग अमेरिका ,ब्रिटेन में सुविधाजनक जिंदगी जीने के लिए बस जाते हैं और विकसित बन जाते हैं ठीक वैसा ही  । वह कैसे एक आम पहाड़ के निवासी की भावना को समझ सकता है पता नहीं छोड़ता हूं आप लोगों पर? तो मुझे लगता है कि अपनी माटी का लगाव का होना बहुत जरूरी है ।


उपरोक्त रिपोर्ट के आधार पर ये कहना अतिश्योक्ति नही होगी कि आने वाले भविष्य में अगर हम स्वम् इस ओर ध्यान नही देंगे तो एक दिन इसका खामियाजा समस्त क्षेत्र को उठाना होगा ।

 ये रिपोर्ट एक छोटा सा सर्वे किया गया है, जिसमे समय समय पर परिवर्तन किया जा  सकता है ।।


आप अपना सुझाव दे सकते है ।

धन्यवाद ! 


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Comments

  1. मैं सभी सुझाओं से सहमत हूं।खास कर विजय डोभाल जी ने जो बिंदु रखे है वास्तविक रूप से पलायन रोकने के यही उपाय हैं सरकारी मशीनरी चाहे कुछ भी कर ले, उन्होंने नीति तो चुनाव को देख कर ही बनानी है और राजनेताओं का क्या उनको वोट मिलने चाहे लोग पहाड़ में बसें चाहे मैदान में वैसे। वोट ही तो है चुनाव के दिन घर आ ही जाते हैं वो चाहे समर्थन के लिया चाहे चंद पैसों लालच में।

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  2. में भी इस बात पूर्णतः सहमत हूँ कि पलायन का मुख्य कारण सरकारे हैं इसमें हमारी कुछ व्यक्तिगत सोच पे भी निर्भर करता हैं क्योंकि सब पढे लिखे युवाओ को सरकारी नौकरी मिलना मुमकिन नही इसलिए स्वरोजगार को अपनाओ जिससे पलायन को रोका जा सकता है

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