रूपनौल सौड़ बुग्याल में पहली बार Butter Festival, जन्माष्टमी पर होगी मक्खन की होली


रूपनौल सौड़ बुग्याल में पहली बार सजेगा बटर फेस्टिवल, कृष्ण जन्माष्टमी पर मक्खन की होली से गूंजेगा हिमालय।
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के हिमालयी अंचल में एक नई सांस्कृतिक पहल आकार ले रही है। उत्तरकाशी के रूपनौल सौड़ बुग्याल में इस वर्ष पहली बार बटर फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 4 सितंबर 2026 को होने वाले इस आयोजन को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों में खासा उत्साह है। दशगी, भंडारस्यु, बड़कोट और पल्ली मुंगरसन्ति पट्टियों के ग्रामीण आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं।
यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि क्षेत्र की लोक संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक विरासत को नई पहचान देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीणों की उम्मीद है कि बटर फेस्टिवल के जरिए रूपनौल सौड़ और आसपास का बौख टिब्बा क्षेत्र पर्यटन के नक्शे पर अपनी अलग पहचान बना सकेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।


मक्खन की होली से जुड़ी है लोक परंपरा
उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल में होने वाला पारंपरिक अंढूड़ी उत्सव दूध, दही, मक्खन और मट्ठे की होली के लिए प्रसिद्ध है। इसी हिमालयी सांस्कृतिक परंपरा की तर्ज पर रूपनौल सौड़ में भी बटर फेस्टिवल की शुरुआत की जा रही है। दयारा बुग्याल का आयोजन लंबे समय से स्थानीय पशुपालक जीवन, प्रकृति और लोक आस्था से जुड़ा रहा है।
रूपनौल सौड़ में होने वाले आयोजन में भी स्थानीय लोक परंपराओं, पूजा-अर्चना, लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों को प्रमुख स्थान दिया जाएगा। ऐसे में पहली बार आयोजित होने वाला यह उत्सव आने वाले वर्षों में क्षेत्र की एक नई पहचान बन सकता है।



करीब 3000 मीटर की ऊंचाई पर है रूपनौल सौड़
रूपनौल सौड़ बुग्याल समुद्र तल से करीब 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और लगभग डेढ़ किलोमीटर के क्षेत्र में फैला बताया जाता है। इसके आसपास बांज, बुरांश, मोरू, राई और मोरिंडा के जंगल हैं। खुले बुग्याल से हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
प्राकृतिक खूबसूरती के साथ यहां की लोक मान्यताएं और ग्रामीण जीवन इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से भी खास बनाते हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग अब इसे सिर्फ स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि संभावनाओं से भरे पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित होते देखना चाहते हैं।


चार पट्टियों के ग्रामीण होंगे शामिल
पहले बटर फेस्टिवल को लेकर क्षेत्र की चार पट्टियों में उत्साह है। दशगी, भंडारस्यु, बड़कोट और पल्ली मुंगरसन्ति पट्टियों के ग्रामीण इस आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।
इन इलाकों के लोगों के लिए यह आयोजन अपनी संस्कृति और परंपराओं को सामूहिक रूप से सामने रखने का अवसर भी है। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय उत्पाद उत्सव को पहाड़ के वास्तविक रंग से जोड़ेंगे।

पर्यटन और रोजगार की उम्मीद
स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि बटर फेस्टिवल के जरिए रूपनौल सौड़ को नई पर्यटन पहचान मिल सकती है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होमस्टे, स्थानीय उत्पाद, पशुपालन, पारंपरिक खाद्य पदार्थ और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विकास के साथ स्थानीय युवाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर मिलें, यही इस पहल के पीछे एक महत्वपूर्ण सोच है। वहीं महिलाओं की भागीदारी से स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को बाजार से जोड़ने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
सड़क और सुविधाओं के विकास की भी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में सड़क, पैदल मार्ग, पेयजल, ठहरने और अन्य जरूरी सुविधाओं का विकास किया जाए तो रूपनौल सौड़ बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है। बौख टिब्बा क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में हुई पहल के बाद स्थानीय स्तर पर भी गतिविधियां तेज हुई हैं।
हालांकि पर्यटन के विस्तार के साथ बुग्याल और जंगलों की प्राकृतिक संवेदनशीलता को बनाए रखना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। स्थानीय संस्कृति और प्रकृति दोनों को साथ लेकर चलना ही इस नए पर्यटन क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती और जरूरत होगी।

पहली बार का यह उत्सव बनेगा नई परंपरा की शुरुआत?
रूपनौल सौड़ बुग्याल में वर्ष 2026 में पहली बार आयोजित होने जा रहा बटर फेस्टिवल आने वाले समय के लिए एक नई शुरुआत है। यदि स्थानीय समुदाय, प्रशासन और पर्यटन से जुड़े लोग मिलकर इसे व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाते हैं तो यह आयोजन उत्तरकाशी के पर्यटन मानचित्र पर एक नया अध्याय जोड़ सकता है।
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन जब हिमालय की ऊंचाइयों में लोकगीत गूंजेंगे, पारंपरिक नृत्य होंगे और मक्खन की होली खेली जाएगी, तब यह केवल एक दिन का उत्सव नहीं होगा। यह उस पहाड़ की संस्कृति को सामने लाने की कोशिश होगी, जो आज भी अपनी मिट्टी, पशुपालन, लोक आस्था और प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।
रूपनौल सौड़ में इस बार सिर्फ एक बटर फेस्टिवल शुरू नहीं हो रहा, बल्कि हिमालय की एक नई पहचान की पहली पंक्ति लिखी जा रही है।



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