उत्तराखण्ड की प्रमुख योजनाएं एवं महत्वपूर्ण तथ्य
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा राज्य के विकास और जन कल्याण के लिए समय-समय पर कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की गई हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इन योजनाओं का विवरण नीचे दिया गया है:
1. मेरा गाँव मेरी सड़क योजना
- शुरुआत: 2014 में।
- उद्देश्य: इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में एक किलोमीटर तक की सड़क ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत बनायी जायेगी।
2. मेरा गाँव मेरा धन योजना
- शुरुआत: 2014 में।
- विवरण: इसके तहत गाँवों में कोई भी व्यक्ति अपना पैसा भवन निर्माण में निवेश कर सकता है। इन भवनों को सरकार स्कूल, अस्पताल, आईटीआई, आंगनबाड़ी जैसे संस्थान खोलने के लिये किराये पर लेगी।
3. मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना
- शुरुआत: 2 अगस्त 2021।
- उद्देश्य: कोरोना महामारी (2020) के समय अनाथ हुए बच्चों को आर्थिक मदद एवं संरक्षण प्रदान करना।
- लाभ: अनाथ बच्चों को कक्षा 12वीं तक निःशुल्क शिक्षा एवं प्रतिमाह 3 हजार रूपये भत्ता दिया जायेगा।
4. मुख्यमंत्री दाल पोषित योजना
- शुरुआत: 12 सितम्बर 2019 (मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा)।
- लाभ: राशन कार्ड धारक परिवारों को 2 किलो दाल प्रतिमाह रियायती दरों पर दी जायेगी (जैसे ₹44 प्रति किग्रा की दर से चने की दाल)। इससे लगभग 23.32 लाख राशन कार्ड धारकों को लाभ मिलेगा।
5. चारधाम राजमार्ग विकास योजना
- शुरुआत: 27 दिसम्बर 2016 (प्रधानमंत्री द्वारा)।
- उद्देश्य: चारों धामों तक 'आलवेदर रोड' बनाना। इसके लिए ₹12,000 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।
- विशेष: इसके तहत 889 किमी सड़कों को 10 मीटर तक चौड़ीकरण करना है। साथ ही टनकपुर से पिथौरागढ़ तक 48 किमी रोड का उन्नयन भी शामिल है।
6. अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना
- शुरुआत: 25 दिसम्बर 2018।
- विवरण: इस योजना के लिए सरकार ने गोल्डन कार्ड व हेल्पलाइन नम्बर 104 जारी किया है।
- लाभ: आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक की निःशुल्क चिकित्सा सुविधा मिलती है। उत्तराखण्ड में इसके तहत अब कुल 23 लाख परिवारों को कवर किया जा रहा है।
7. मुख्यमंत्री अन्त्योदय निःशुल्क गैस रिफिल योजना
- शुरुआत: 12 फरवरी 2023।
- लाभ: अन्त्योदय परिवारों को प्रतिवर्ष 3 मुफ्त गैस सिलेंडर रिफिल की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसकी नोडल एजेंसी खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग है।
8. आशा संगिनी एप एवं पोर्टल
- शुरुआत: नवम्बर 2022।
- उद्देश्य: आशा स्वास्थ्य कर्मियों के कार्यों को डिजिटल माध्यम से ट्रैक करना और उनके मानदेय भुगतान में पारदर्शिता लाना।
9. मुख्यमंत्री उत्थान योजना एवं ज्ञानकोष योजना
- उत्थान योजना: निर्धन एवं मेधावी छात्रों को आईएएस, पीसीएस, इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग प्रदान करना।
- ज्ञानकोष योजना: राज्य के प्रत्येक जिले में पुस्तकालय स्थापित करना ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को मदद मिले।
10. उदीयमान छात्र योजना
- शुरुआत: 27 जुलाई 2021।
- उद्देश्य: राज्य लोक सेवा आयोग और अन्य मुख्य परीक्षाओं की तैयारी के लिए निर्धन छात्रों को वित्तीय सहायता देना।
11. मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना
- शुरुआत: 2023 में।
- विवरण: कक्षा 6 से 12 तक के 10% मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाती है।
12. रोजगार प्रयाग पोर्टल
- शुरुआत: 10 अक्टूबर 2023 (देहरादून)।
- उद्देश्य: इस पोर्टल के माध्यम से युवाओं को एक ही जगह पर सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों की जानकारी उपलब्ध कराना।
12. मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना
- घोषणा: अगस्त 2023 में की गई।
- उद्देश्य: उच्च शिक्षा में शोध (Research) कर रहे मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करना और उनके शोध कार्य में आने वाली आर्थिक बाधाओं को दूर करना।
13. रोजगार प्रयाग पोर्टल
- शुरुआत: 10 अक्टूबर 2023 (देहरादून जनपद से)।
- विवरण: इस पोर्टल के माध्यम से राज्य के शिक्षित युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार सरकारी और आउटसोर्सिंग नौकरियों की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराई जाती है।
14. अटल खाद्यान्न योजना
- शुरुआत: 11 फरवरी 2011 से राज्य में लागू।
- लाभ: बीपीएल (BPL) परिवारों को इस योजना के तहत बहुत ही सस्ती दरों पर गेहूँ और चावल उपलब्ध कराया जाता है।
15. सर्वश्रेष्ठ आकांक्षी जिला कार्यक्रम
- शुरुआत: 2018 में।
- विवरण: नीति आयोग द्वारा सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों के विकास के लिए यह कार्यक्रम शुरू किया गया। उत्तराखण्ड के हरिद्वार जिले को देश के सर्वश्रेष्ठ आकांक्षी जिलों की श्रेणी में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ है।
16. आपातकालीन सेवा योजना (108)
- शुरुआत: 17 अप्रैल 2012 को 108 आपातकालीन सेवा की आधिकारिक शुरुआत की गई।
- नामकरण: यह सेवा तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खण्डूरी जी के प्रयासों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर संचालित है।
17. राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना
- विवरण: केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की यह पहल है, जिसके तहत 9-14 वर्ष के बच्चों को खतरनाक उद्योगों में काम करने से बचाना और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
- शिक्षा: केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इसे 'राष्ट्रीय शिक्षा अभियान' में समाहित कर दिया है। वर्तमान में इसे समग्र शिक्षा अभियान के नाम से जाना जाता है।
18. मुख्यमंत्री नमक पोषण योजना
- शुरुआत: 6 जुलाई 2024 (नत्थूवाला से)।
- उद्देश्य: राज्य के अन्त्योदय और पात्र प्राथमिक परिवारों को कुपोषण से बचाने के लिए प्रतिमाह रियायती दरों पर आयोडाइज्ड नमक उपलब्ध कराना।
19. वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC)
- शुरुआत: वर्ष 2020 से राज्य में राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी को लागू किया गया। इसके माध्यम से बायोमेट्रिक पहचान द्वारा अन्य राज्यों के कार्डधारकों को खाद्यान्न प्राप्त हो सकेगा।
- रैंकिंग: वितरण के दृष्टिकोण से उत्तराखण्ड देश में 5वें स्थान पर है।
- तकनीक: वर्तमान में राज्य के समस्त राशन कार्डों को आधार (UIDAI) से लिंक कर 'एंड-टू-एंड कंप्यूटराइजेशन' कर दिया गया है।
20. ग्रेन ए.टी.एम. (Grain ATM)
- विवरण: संयुक्त राष्ट्र-विश्व खाद्य कार्यक्रम (UN-WFP) के सहयोग से उत्तराखण्ड 'ग्रेन ए.टी.एम.' (देहरादून) स्थापित करने वाला देश का तीसरा राज्य बना (हरियाणा और ओडिशा के बाद)।
- विस्तार: वर्तमान में राज्य में 21 नये ग्रेन ए.टी.एम. स्थापित किये गये हैं।
21. खाद्यान्न गोदाम (Flospans)
- स्थापना: विश्व खाद्य कार्यक्रम (UN-WFP) के आर्थिक सहयोग से 500 मी.टन क्षमता का खाद्यान्न गोदाम रामनगर (नैनीताल) में बनाया गया है।
- विशेष: यह देश का पहला 'फ्लोस्पेन' (Flospan) खाद्यान्न गोदाम है।
22. उत्तराखण्ड ईंधन सखी योजना
- शुरुआत: 15 दिसम्बर 2023।
- उद्देश्य: मिनी गैस एजेंसी के माध्यम से सुदूर पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को रसोई गैस सिलेंडर की रिफिलिंग की समस्या का समाधान करना। इसे HP कंपनी द्वारा 4 जनपदों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया गया है।
23. समेकित बाल विकास कार्यक्रम
- विवरण: केन्द्र सरकार द्वारा 1975 ई० से राज्य के समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों में चलाया जा रहा है।
24. पालना योजना
- शुरुआत: 2 अक्टूबर 2015।
- उद्देश्य: उत्तराखण्ड सरकार द्वारा अनाथ बच्चों को गोद लेने के प्रयास के तहत इसकी शुरुआत की गयी।
25. खिलती कलियां योजना
- शुरुआत: 15 अगस्त 2015।
- उद्देश्य: उत्तराखण्ड सरकार द्वारा 6 वर्ष तक के बच्चों को कुपोषण से बचाने का प्रयास किया जायेगा।
26. गंगा जल परियोजना
- विवरण: गंगोत्री से गंगा नदी के पवित्र जल का संग्रह कर डाकघरों के माध्यम से वितरण।
- शुरुआत: 1 जनवरी 2019 से उत्तरकाशी मुख्य डाकघर में 250 मिलीलीटर की बोतलों में इसकी शुरुआत हुई।
- उपलब्धि: वित्तीय वर्ष 2023-24 में (दिसम्बर 2024 तक) गंगा जल की कुल 26961 बोतलें उत्तराखण्ड परिमण्डल के डाकघरों के माध्यम से वितरित की गईं।
महिला व बाल विकास योजनाएं (उत्तराखंड)
27. राष्ट्रीय पोषाहार मिशन योजना: केन्द्र सरकार ने 2001-02 में शुरू की, इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों, गर्भवती महिलाओं, किशोरियों एवं नवजात शिशु को पोषण देने वाली महिलाओं को नि:शुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराना है।
28. स्वाधार योजना: 2001-02 के तहत महिलाओं को कामकाजी एवं सशक्त बनाने के लिए शुरू की गयी।
29. मोनाल परियोजना: अप्रैल 2011 के तहत 11-18 वर्ष तक की किशोरियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार करना था।
30. स्वावलम्बन कार्यक्रम: 1996 के तहत महिलाओं को परम्परागत व गैर परम्परागत धन्धों का प्रशिक्षण एवं कौशल प्रदान कर स्वरोजगार प्राप्त करने में मदद करनी है।
31. मुख्यमंत्री कन्या सामूहिक विवाह योजना 2023: 9 नवम्बर 2023 को उत्तराखण्ड स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री धामी जी द्वारा मुख्यमंत्री कन्या सामूहिक विवाह योजना की घोषणा की, जिसके तहत प्रदेश के जरूरतमंद परिवारों को विवाह हेतु जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
32. मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना:
- शुरुआत - 30 अक्टूबर 2021 (केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा देहरादून में की गयी)
- घस्यारी योजना का उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
- इस योजना के तहत महिलाओं को चारा पट्टी के लिए जंगल जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी इसके तहत जानवरों को पौष्टिक भोजन सब्सिडी के दर पर दिया जायेगा।
- इस योजना का लक्ष्य पर्वतीय क्षेत्र की महिला पशुपालकों को 3 रुपये प्रति किलो ग्राम की रियायती दर पर आहार (चाराकिट) उपलब्ध कराना है।
33. उत्तराखण्ड वैष्णवी सुरक्षा योजना:
- वैष्णवी किट योजना के तहत सरकार हर परिवार में बेटी के जन्म होने पर नवजात शिशु को वैष्णवी किट भेजेगी। इस योजना का संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किया जायेगा।
- इस योजना के तहत बच्ची के जन्म लेते ही परिवार के सदस्यों को उसके साथ सेल्फी खींचकर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी टोल फ्री नंबर पर भेजनी है। सरकार के द्वारा परिवार को बधाई संदेश भी दिया जायेगा।
- यह योजना 24 जनवरी 2018 को शुरू की गयी, जिसका सम्बन्ध 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना' से है।
- कुक्ड फूड के अन्तर्गत 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्रों पर माता समिति के माध्यम से पका भोजन (Hot Cooked Meal) प्रदान किया जा रहा है।
34. मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना: बच्चों की संख्या में वृद्धि एवं कुपोषण को दूर करने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत बच्चों को सप्ताह में दो दिन अण्डा, दो दिन केला/सेब दिया जायेगा।
35. वन्देमातरम् योजना: 9 फरवरी 2004 से गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क उपचार सुविधा प्रदान करना है।
36. मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना: 17 जुलाई 2021 से मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गयी। इसके तहत गर्भवती महिलाओं एवं शिशु को किट उपलब्ध करायी जायेगी। राज्य में प्रथम दो बालिकाओं एवं आंगनबाड़ी केन्द्र में पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को प्रथम दो बालिकाओं के जन्म पर इस योजना का लाभ दिया जाता है।
37. महिला सारथी योजना:
- इस योजना की शुरुआत अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2025 को की गई, इस योजना के तहत महिलाओं को बस चालक का प्रशिक्षण दिया जायेगा।
- देहरादून में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू करने के बाद भविष्य में अन्य शहरों में भी किया जायेगा। इससे रोडवेज बसों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी व महिलायें आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बनने में सक्षम होंगी।
38. नंदा-गौरा योजना:
- महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग द्वारा निर्धन कन्याओं हेतु संचालित विभिन्न योजनाओं (नंदा देवी एवं गौरा देवी) का क्रियान्वयन जून 2017 में किया गया। इस योजना की शुरुआत जनवरी 2018 से की गयी।
- नंदा गौरा योजना का मुख्य उद्देश्य लिंगानुपात में सुधार, कन्या भ्रूण हत्या रोकना एवं उच्च शिक्षा प्रदान करना है।
- इस योजना का लाभ राज्य में निवास करने वाली उन अविवाहित बालिकाओं को दिया जायेगा। शुरुआत में बालिका के जन्म पर 11000 तथा 12वीं पास होने पर 51000 हजार रुपये दिये जाने की व्यवस्था है।
39. मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना: 7 मार्च 2019 से शुरू। इस योजना के अन्तर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों को फोर्टिफाईड सुगन्धित दूध पाउडर उपलब्ध कराया जाता है।
40. किशोरी शक्ति योजना: इसके तहत बालिकाओं को प्रशिक्षित एवं प्रबुद्ध बनाना है।
41. जननी सुरक्षा योजना:
- शुरुआत – 12 अप्रैल 2005
- इसके तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने पर ₹700 की धनराशि दी जाती है।
- जननी सुरक्षा योजना के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को भी सम्मिलित किया गया जिसकी जिम्मेदारी सुरक्षित प्रसव कराना है।
42. मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना: गर्भवती महिलाओं व धात्री माताओं के स्वास्थ्य में सुधार एवं एनीमिया में कमी लाने के उद्देश्य से आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं व धात्री माताओं को सप्ताह में दो दिन अंडा व फल दिया जाता है।
43. सबला योजना:
- घोषणा – 19 नवम्बर 2010
- कार्यान्वयन – 1 अप्रैल 2011
- इसके तहत 11–18 वर्ष के विद्यालय न जाने वाली किशोरियों को साक्षर कर अनौपचारिक शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ना है।
- सबला योजना सर्वप्रथम 4 जिलों (देहरादून, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल व नैनीताल) में शुरू की गयी।
44. मुख्यमंत्री सशक्त बहिन उत्सव योजना:
- शुरुआत – 24 अगस्त 2023
- उद्देश्य – इसके तहत राज्य के महिला स्वयं सहायता समूहों को उत्पादों हेतु बाजार उपलब्ध कराना है।
45. मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना:
- शुरुआत – 15 अगस्त 2019
- इस योजना के तहत सरकार 1 लाख महिलाओं को 'अम्ब्रेला शॉप' की तर्ज पर शैली की दुकान (कियोस्क) तैयार करके देगी।
- सरकार के अनुसार इसके तहत 20,000 महिला समूहों को जोड़कर ये दुकानें विभिन्न पर्यटन क्षेत्रों में होंगी।
46. मुख्यमंत्री लखपति दीदी योजना:
- शुरुआत – 4 नवम्बर 2022 (मुख्यमंत्री धामी द्वारा इगास पर्व पर)।
- उत्तराखण्ड में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए इस योजना की शुरुआत की गयी।
- वर्ष 2025 तक इस योजना के तहत 1.25 लाख महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य है, इसका संचालन ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जा रहा है।
47. किशोरी शक्ति योजना: 2000-01 के तहत 11 से 18 वर्ष की बालिकाओं को प्रशिक्षित एवं प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना है।
48. जननी सुरक्षा योजना:
- शुरुआत – 12 अप्रैल 2005
- इसके तहत सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराने पर गर्भवती को 1400 रू० की धनराशि दी जाती है। इसे 2017 में बढ़ाकर 6000 रू० कर दिया गया।
- जननी सुरक्षा योजना के तहत 'खुशियों की सवारी' को 2015 में शामिल किया गया जिसकी जिम्मेदारी जच्चा व बच्चा को सुरक्षित घर पहुँचाने की है।
49. मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना: इस योजना के तहत प्रदेश की गर्भवती महिलाओं व धात्री माताओं में एनीमिया एवं मातृत्व मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से आंगनबाड़ी में पंजीकृत गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं को सप्ताह में दो दिन अण्डा, दो दिन केला/खजूर दिया जाता है।
50. सबला योजना:
- घोषणा – 19 नवम्बर 2010
- कार्यान्वयन – 1 अप्रैल 2011
- इसके तहत 11-18 वर्ष के शिक्षा से वंचित किशोरियों को औपचारिक और अनौपचारिक शिक्षा की मुख्य धारा में लाना व उनका विकास सुनिश्चित करना था।
- सबला योजना सर्वप्रथम 4 जिलों हरिद्वार, चमोली, उत्तरकाशी एवं नैनीताल में शुरू की गयी।
51. मुख्यमंत्री सशक्त बहिन उत्सव योजना:
- शुरुआत – 24 अगस्त 2023
- उद्देश्य – इसके तहत राज्य के महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों हेतु व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है।
52. मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना:
- शुरुआत – 15 अगस्त 2019
- इस योजना के तहत सरकार 1 साल के भीतर महिलाओं के लिए 5100 पहाड़ी शैली की दुकान (कियोस्क) तैयार करेगी।
- सरकार के अनुसार इसके तहत 20 हजार महिलाओं को लाभ मिलेगा जो दुकानें विभिन्न पर्यटन क्षेत्रों में होंगी।
53. मुख्यमंत्री लखपति दीदी योजना:
- शुरुआत – 4 नवम्बर 2022 (मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा)।
- उत्तराखण्ड में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को लखपति बनाने के लिए इस योजना की शुरुआत की गयी।
- वर्ष 2025 तक इस योजना के तहत 1.25 लाख महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य है, इसका संचालन ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जाता है।
54. महिला उद्यमी विशेष प्रोत्साहन योजना:
- शुरुआत – 15 अगस्त 2015
- उद्देश्य – सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्षेत्र में महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र में उद्यमशील महिलाओं को बैंकों से आसान ऋण उपलब्ध कराना है।
- इस योजना के तहत कुल स्थिर पूँजी निवेश का एक चौथाई या अधिकतम 25 लाख रू० की उत्पादन सहायता प्रदान की जायेगी।
[उत्तराखण्ड महिला आरक्षण]
- उत्तराखण्ड सरकार ने 18 जुलाई 2001 को सरकारी नौकरियों में राज्य की मूल निवासी महिलाओं को 20% आरक्षण देने का आदेश जारी किया था।
- 24 जुलाई 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने महिला आरक्षण को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया था।
- अक्टूबर 2022 को उच्च न्यायालय ने महिला आरक्षण पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद 4 नवम्बर 2022 को सरकार की स्पेशल लीव पिटीशन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।
- 29 नवम्बर 2022 को सरकार ने विधानसभा में विधेयक पेश किया जिसे 30 नवम्बर 2022 में सर्वसम्मति से पारित कर राजभवन भेजा गया।
- 10 जनवरी 2023 को विधेयक पर राज्यपाल मंजूरी के बाद महिला आरक्षण कानून बन गया।
मुख्य आकर्षक बिन्दु
- वेश्यावृत्ति निवारण अधिनियम 1956 ई० में पारित किया गया।
- प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम 1961 ई० के तहत गर्भवती महिलाओं को सवैतनिक अवकाश दिए जाने का प्रावधान है।
- दहेज निषेध अधिनियम 1961 ई० में पारित हुआ।
- समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 ई० के तहत महिला एवं पुरुष को समान कार्य के लिये समान वेतन दिये जाने का प्रावधान है।
- राज्य सरकार द्वारा सन् 2006-07 को महिला सशक्तिकरण वर्ष घोषित किया गया था।
- उत्तराखण्ड सरकार ने उत्तरप्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 में संशोधन 2021 को लागू करते हुए महिलाओं को पैतृक संपत्ति में सहखातेदार का अधिकार दिया गया।
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