लखवाड़ कैट प्लान: ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की नई पहल, 30 सरपंचों ने किया 'मॉडल विलेज' जड़धार गाँव का भ्रमण
नई टिहरी / मसूरी: लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना के अंतर्गत जलग्रहण क्षेत्र उपचार योजना (Lakhwar CAT Plan) के तहत एक महत्वपूर्ण शैक्षिक एवं व्यावहारिक भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस तीन दिवसीय भ्रमण में परियोजना क्षेत्र के 30 विभिन्न गाँवों के सरपंचों और जन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन (Livelihood Promotion) के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के सफल मॉडलों को समझना और उन्हें अपने क्षेत्रों में लागू करना था।
जड़धार गाँव: प्रेरणा का मुख्य केंद्र
भ्रमण दल ने टिहरी गढ़वाल के प्रसिद्ध 'मॉडल विलेज' जड़धार गाँव का दौरा किया। गौरतलब है कि जड़धार गाँव को भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा 'Green & Clean Award' से सम्मानित किया जा चुका है। यह गाँव न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए सामुदायिक वन प्रबंधन और बीज संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण है।
भ्रमण के मुख्य बिंदु और सीख
भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों और स्थानीय ग्रामीणों ने सरपंचों को निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी:
- जल एवं मृदा संरक्षण: ग्रामीणों ने सीखा कि कैसे चाल-खाल और छोटे चेकडैम के माध्यम से वर्षा जल को सहेजकर सूखते हुए जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जा सकता है।
- सामुदायिक वन प्रबंधन: जड़धार गाँव की 'वन सुरक्षा समिति' के मॉडल को समझाया गया, जिसने दशकों पहले बंजर हो चुके पहाड़ों को फिर से हरा-भरा कर दिया।
- पारंपरिक बीज संरक्षण: यहाँ के प्रसिद्ध 'बीज बचाओ आंदोलन' के माध्यम से पारंपरिक फसलों की खेती और उनकी मार्केटिंग से आजीविका बढ़ाने के गुर सिखाए गए।
- स्वच्छता और ईको-टूरिज्म: 'क्लीन एंड ग्रीन' पुरस्कार विजेता गाँव होने के नाते, यहाँ कचरा प्रबंधन और गाँव को पर्यटन के नक्शे पर लाने की रणनीतियों पर चर्चा की गई।
लखवाड़ कैट प्लान का उद्देश्य
मसूरी वन प्रभाग के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम के बारे में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि लखवाड़ परियोजना के निर्माण के साथ-साथ उसके जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) का उपचार अत्यंत आवश्यक है।
"इस योजना का लक्ष्य केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि जलग्रहण क्षेत्र में रहने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति को सुधारना भी है। जब ग्रामीण आजीविका के लिए वनों पर निर्भर होने के बजाय उनके संरक्षक बनेंगे, तभी पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।"
सरपंचों का अनुभव
भ्रमण में शामिल सरपंचों ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि जड़धार गाँव की सफलता देख उन्हें विश्वास हुआ है कि सरकारी योजनाओं और जन-भागीदारी के मेल से गाँवों की तस्वीर बदली जा सकती है। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने गाँवों में जाकर यहाँ सीखी गई तकनीकों, जैसे जैविक खेती और जल संचय को प्राथमिकता देंगे।
आयोजक और सहयोगी
इस तीन दिवसीय शैक्षिक भ्रमण का आयोजन जन चेतना केंद्र (सामाजिक संस्था) द्वारा किया गया था, जिसे मसूरी वन प्रभाग का पूर्ण सहयोग प्राप्त रहा। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को पर्यावरण प्रहरी के रूप में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
लखवाड़ कैट प्लान के तहत की गई यह पहल आने वाले समय में टिहरी और देहरादून के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास की नई इबारत लिख सकती है। 'मॉडल विलेज' के अनुभवों को धरातल पर उतारना ही इस शैक्षिक भ्रमण की वास्तविक सफलता होगी।
इस अवसर पर कैम्पटी एवम भद्रिगाड रेंज से श्री भरत सिंह श्री सुरेन्द्र सिंह श्री राजेन्द्र प्रसाद नौटियाल श्री रणजीत सिंह पंवार श्री राजेन्द्र सिंह रौछेला श्री सूरज सिंह रावत श्री गोविन्द सिंह रावत श्री राहुल सिंह नेगी श्री कैलू टट्टा श्री विरेन्द्र धीमान श्री बनारू सिंह, सविता रमोला सोबत सिंह अर्जुन सिंह अर्जुन सिंह रावत अमरिंदर पंवार सुनील सिंह विरेंश सिंह सुरवीर सिंह भरत सिंह नरेंद्र सिंह आदि सम्मलित रहे ।