ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025: 'जीते जी इलाहाबाद' के लिए मिला सम्मान
साहित्य जगत से एक बड़ी और गौरवशाली खबर सामने आ रही है। प्रख्यात लेखिका ममता कालिया को वर्ष 2025 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके संस्मरण 'जीते जी इलाहाबाद' के लिए दिया जा रहा है।
साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 की मुख्य बातें
हाल ही में साहित्य अकादमी ने 24 भारतीय भाषाओं के लिए अपने वार्षिक पुरस्कारों का ऐलान किया है। इस बार के पुरस्कारों में विविधता का खास ध्यान रखा गया है:
- कुल पुरस्कार: 24 भाषाओं में चयन।
- विधाएं: 8 कविता संग्रह, 4 उपन्यास, 6 कहानी संग्रह, 2 निबंध, 1 आलोचना, 1 आत्मकथा और 2 संस्मरण।
- अन्य प्रमुख विजेता: अंग्रेजी में नवतेज सरना (उपन्यास: 'क्रिमसन स्प्रिंग') और उर्दू में प्रितपाल सिंह (कविता संग्रह: 'सफर जारी है') को सम्मानित किया जाएगा।
- सम्मान राशि: विजेताओं को एक उत्कीर्ण ताम्रफलक, शॉल और 1 लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी।
- समारोह की तिथि: यह पुरस्कार समारोह 31 मार्च को आयोजित किया जाएगा।
ममता कालिया का साहित्यिक सफर और पुरस्कार
ममता कालिया हिंदी साहित्य का एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने अपनी लेखनी से समाज के मध्यम वर्ग और महिलाओं के संघर्षों को बखूबी उकेरा है। 'जीते जी इलाहाबाद' में उन्होंने अपने जीवन के आत्मीय अनुभवों और इलाहाबाद (प्रयागराज) की यादों को संजोया है।
ममता कालिया को अब तक मिले प्रमुख सम्मान:
ममता जी का करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्हें मिले कुछ प्रमुख पुरस्कार इस प्रकार हैं:
- व्यास सम्मान (2017): उनके उपन्यास 'दुक्खम-सुक्खम' के लिए।
- यशपाल स्मृति सम्मान
- साहित्य भूषण सम्मान (उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा)
- राम मनोहर लोहिया सम्मान
- अमृता प्रीतम स्मृति सम्मान
- कमलेश्वर स्मृति सम्मान
नाटक अकादमी सम्मान की भी हुई घोषणा
साहित्य के साथ-साथ कला जगत के लिए भी बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी ने 4 वर्षों (2021-2024) से लंबित पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इसमें सुषमा और मनोज समेत कुल 52 विभूतियों को कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।
निष्कर्ष: ममता कालिया जैसी विदुषी लेखिका को साहित्य अकादमी मिलना हिंदी साहित्य के लिए गर्व का विषय है। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेंगी।
साहित्य अकादमी पुरस्कार: हिंदी विजेताओं की पूर्ण सूची (1955 - 2025)
साहित्य अकादमी पुरस्कार भारत का एक अत्यंत प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान है। हिंदी भाषा के लिए पहला पुरस्कार 1955 में माखनलाल चतुर्वेदी को दिया गया था।
प्रमुख वर्षों के विजेता और उनकी कृतियाँ
|
वर्ष |
लेखक |
रचना (विधा) |
|---|---|---|
|
1955 |
माखनलाल चतुर्वेदी |
हिम तरंगिणी (काव्य) |
|
1958 |
राहुल सांकृत्यायन |
मध्य एशिया का इतिहास (इतिहास) |
|
1959 |
रामधारी सिंह 'दिनकर' |
संस्कृति के चार अध्याय (भारतीय संस्कृति) |
|
1960 |
सुमित्रानंदन पंत |
कला और बूढ़ा चाँद (काव्य) |
|
1964 |
अज्ञेय |
आँगन के पार द्वार (काव्य) |
|
1966 |
जैनेंद्र कुमार |
मुक्तिबोध (उपन्यास) |
|
1968 |
हरिवंश राय बच्चन |
दो चट्टानें (काव्य) |
|
1969 |
श्रीलाल शुक्ल |
राग दरबारी (उपन्यास) |
|
1970 |
रामविलास शर्मा |
निराला की साहित्य साधना (जीवनी) |
|
1972 |
भवानी प्रसाद मिश्र |
बुनी हुई रस्सी (काव्य) |
|
1973 |
हजारी प्रसाद द्विवेदी |
आलोक पर्व (निबंध) |
|
1974 |
शिवमंगल सिंह 'सुमन' |
मिट्टी की बारात (काव्य) |
|
1975 |
भीष्म साहनी |
तमस (उपन्यास) |
|
1977 |
शमशेर बहादुर सिंह |
चुका भी हूँ नहीं मैं (काव्य) |
|
1980 |
कृष्णा सोबती |
ज़िन्दगीनामा - ज़िन्दा रुख (उपन्यास) |
|
1982 |
हरिशंकर परसाई |
विकलांग श्रद्धा का दौर (व्यंग्य) |
|
1989 |
केदारनाथ सिंह |
अकाल में सारस (कविता) |
|
1992 |
गिरिराज किशोर |
ढाई घर (उपन्यास) |
|
1997 |
लीलाधर जगूड़ी |
अनुभव के आकाश में चाँद (काव्य) |
|
1999 |
विनोद कुमार शुक्ल |
दीवार में एक खिड़की रहती थी (उपन्यास) |
|
2005 |
मनोहर श्याम जोशी |
क्याप (उपन्यास) |
|
2014 |
रमेश चंद्र शाह |
विनायक (उपन्यास) |
|
2017 |
रमेश कुंतल मेघ |
विश्वमिथक सरित्सागर (समालोचना) |
|
2020 |
अनामिका |
टोकरी में दिगंत 'थेरीगाथा' (कविता) |
|
2021 |
दया प्रकाश सिन्हा |
सम्राट अशोक (नाटक) |
|
2022 |
बद्रीनारायण |
तुमड़ी के शब्द (कविता) |
|
2023 |
संजीव |
मुझे पहचानो (उपन्यास) |
|
2024 |
चित्रा मुदगल |
(घोषणा उपरांत संकलन) |
|
2025 |
ममता कालिया |
जीते जी इलाहाबाद (संस्मरण) |
पुरस्कार से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ:
- स्थापना: 1954 में हुई, पहला पुरस्कार 1955 में दिया गया।
- भाषाएँ: यह 24 भाषाओं (संविधान की 22 भाषाएँ + अंग्रेजी और राजस्थानी) में दिया जाता है।
- अपवाद: 1962 में हिंदी भाषा के लिए कोई पुरस्कार नहीं दिया गया था।
- सम्मान राशि: शुरुआत में यह ₹5,000 थी, जो समय के साथ बढ़कर अब ₹1,00,000 हो गई है।
प्रमुख उपन्यास जिन्हें मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार
उपन्यास साहित्य की सबसे लोकप्रिय विधा है। यहाँ कुछ कालजयी उपन्यास और उनके लेखक दिए गए हैं:
|
वर्ष |
उपन्यासकार |
उपन्यास का नाम |
|---|---|---|
|
1956 |
अमृतलाल नागर |
अमृत और विष |
|
1961 |
भगवतीचरण वर्मा |
भूले बिसरे चित्र |
|
1966 |
जैनेंद्र कुमार |
मुक्तिबोध |
|
1969 |
श्रीलाल शुक्ल |
राग दरबारी |
|
1975 |
भीष्म साहनी |
तमस |
|
1979 |
सुदामा पांडेय 'धूमिल' |
कल सुनना मुझे |
|
1980 |
कृष्णा सोबती |
ज़िन्दगीनामा |
|
1992 |
गिरिराज किशोर |
ढाई घर |
|
1999 |
विनोद कुमार शुक्ल |
दीवार में एक खिड़की रहती थी |
|
2005 |
मनोहर श्याम जोशी |
क्याप |
|
2011 |
काशीनाथ सिंह |
रेहन पर रग्घू |
|
2014 |
रमेश चंद्र शाह |
विनायक |
|
2016 |
नासिर शर्मा |
पारिजात |
|
2023 |
संजीव |
मुझे पहचानो |
प्रमुख काव्य संग्रह (कविताएँ)
कविता प्रेमियों के लिए यह सूची बहुत महत्वपूर्ण है:
|
वर्ष |
कवि |
काव्य संग्रह |
|---|---|---|
|
1955 |
माखनलाल चतुर्वेदी |
हिम तरंगिणी |
|
1960 |
सुमित्रानंदन पंत |
कला और बूढ़ा चाँद |
|
1964 |
अज्ञेय |
आँगन के पार द्वार |
|
1968 |
हरिवंश राय बच्चन |
दो चट्टानें |
|
1972 |
भवानी प्रसाद मिश्र |
बुनी हुई रस्सी |
|
1984 |
रघुवीर सहाय |
लोग भूल गये हैं |
|
1989 |
केदारनाथ सिंह |
अकाल में सारस |
|
1995 |
कुँवर नारायण |
कोई दूसरा नहीं |
|
2002 |
राजेश जोशी |
दो पंक्तियों के बीच |
|
2013 |
मृदुला गर्ग |
मिलजुल मन |
|
2020 |
अनामिका |
टोकरी में दिगंत |
|
2022 |
बद्रीनारायण |
तुमड़ी के शब्द |
कुछ अन्य महत्वपूर्ण विधाएँ:
- संस्मरण (2025): ममता कालिया - 'जीते जी इलाहाबाद'
- नाटक (2021): दया प्रकाश सिन्हा - 'सम्राट अशोक'
- व्यंग्य (1982): हरिशंकर परसाई - 'विकलांग श्रद्धा का दौर'
- आलोचना (1971): डॉ. नामवर सिंह - 'कविता के नये प्रतिमान'
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