देहरादून जनपद का इतिहास
- द्रोणनगर: किंवदंती के अनुसार देहरादून का नाम पहले 'द्रोणनगर' था, जहाँ पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य ने तपस्या की थी।
- पृथ्वीपुर: इतिहासकारों के अनुसार देहरादून का प्राचीन नाम 'पृथ्वीपुर' था।
- मुगल शैली: 1699 ई. में गुरु रामराय ने देहरादून में मुगल शैली के गुरुद्वारे की नींव रखी थी।
- 3 ग्राम दान: गुरु रामराय फतेहशाह के समय देहरादून आये थे। पंवार शासक फतेहशाह ने गुरुद्वारे हेतु 3 गाँव (खुड़बुड़ा, राजपुर, चामसारी) दान में दिये थे।
- नजाबतखां का आक्रमण: 1635 ई. में शाहजहाँ के सेनापति नजाबतखां ने दून घाटी पर आक्रमण किया। उस समय गढ़वाल राज्य की संरक्षिका महारानी कर्णावती थीं।
- नजीबुदौला: प्रदीप शाह के समय रोहिला सरदार नजीबुदौला ने दून क्षेत्र में 1757 में अधिकार किया व 1770 ई. तक राज किया।
- रामा व धरणी: प्रद्युम्न शाह के मंत्री रामा व धरणी ने दून क्षेत्र को व्यवस्थित करने का प्रयास किया, जिनकी हत्या पराक्रम शाह ने करवा दी थी।
- उम्मेद सिंह: 1785 ई. में गुलाम कादिर ने देहरादून पर आक्रमण किया और उम्मेद सिंह को दून का गवर्नर बनाया। प्रद्युम्न शाह ने अपनी पुत्री का विवाह उम्मेद सिंह से कर उसे दून का स्थायी शासक नियुक्त किया।
- खुड़बुड़ा का युद्ध: 14 मई 1804 में देहरादून के खुड़बुड़ा मैदान में गोरखों एवं प्रद्युम्न शाह के बीच युद्ध हुआ, जिसमें प्रद्युम्न शाह वीरगति को प्राप्त हुए।
- अंग्रेजी शासन: 1814 ई. में अंग्रेजी सेना ने मोहन्ड व तिमली दरों से देहरादून में प्रवेश किया। नालापानी में बलभद्र शाह तथा जनरल जिलेस्पी के नेतृत्व वाली अंग्रेजी सेना के बीच भीषण युद्ध हुआ।
- कलंगा स्मारक: नालापानी में जनरल जिलेस्पी और बलभद्र शाह व उनके सैनिकों की स्मृति में 'कलंगा स्मारक' बनाया गया है।
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प्रशासनिक बदलाव:
- 1817 ई. में देहरादून गठन के बाद इसे सहारनपुर मंडल में और 1825 में कुमाऊँ कमिश्नरी में शामिल किया गया।
- 1829 ई. में देहरादून के साथ जौनसार बावर को उपायुक्त रखकर मेरठ मंडल में रखा गया।
- 1871 ई. से देहरादून को अलग जिले के रूप में प्रकाशित किया गया।
- 1975 ई. से देहरादून गढ़वाल मंडल में है।
- नगर निगम: 9 दिसंबर 1998 में देहरादून नगर निगम बनाया गया। (नगर पालिका की स्थापना 1867 ई. में हुई थी)।
- उपनाम: देहरादून को लीची नगर एवं सैनिक नगरी भी कहा जाता है।
देहरादून जनपद की भौगोलिक स्थिति
- दून घाटी: देहरादून शिवालिक और मध्य हिमालय के बीच दून घाटी में बसा है।
- विभाजन: यह जिला दो मुख्य भागों में बँटा है- एक दून घाटी व दूसरा पहाड़ी पर बसा जौनसार-बावर क्षेत्र।
- सीमाएं: यह उत्तराखण्ड का पश्चिमी जिला है। इसकी सीमाएं दो राज्यों- हिमाचल प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश से लगती हैं।
- राजधानी: देहरादून उत्तराखण्ड की अस्थायी राजधानी है।
- पड़ोसी जिले: देहरादून की सीमा 4 जनपदों से लगती है— हरिद्वार, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी।
- हिमाचल से सीमा: देहरादून के 'सिरमौर व शिमला' जिला हिमाचल से और 'सहारनपुर' उत्तर प्रदेश से लगता है।
- विस्तार: दून घाटी राज्य का सबसे बड़ा दून है, जिसकी लंबाई लगभग 75 किमी है। यहाँ मानव जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां पाई जाती हैं।
- भूस्खलन: दून घाटियों में भूस्खलन की घटनाएं लघु या मध्य हिमालय श्रेणी में अधिक होती हैं।
- जलवायु: यहाँ की जलवायु समशीतोष्ण है।
आसन बैराज
- स्थापना: जून 1967 ई. में पूर्वी यमुना नहर और आसन नदी के संगम पर रामपुर मंडी (ढालीपुर) के पास बनाया गया, जिससे 'शक्ति नहर' निकाली गई।
- संस्थान: इसके निकट 'वन आरक्षी प्रशिक्षण संस्थान' स्थित है।
- आसन जलाशय: इसे 'ढालीपुर झील' भी कहा जाता है।
- पक्षी: यहाँ प्रवासी पक्षियों (साइबेरियन) सहित अनेक प्रजातियों के पक्षी देखे जाते हैं।
उत्तराखण्ड वन एवं वन संस्थान
- वन नगर: देहरादून को 'वन नगर' कहा जाता है।
- मानसूनी वन: दून घाटियों में मानसूनी वन पाए जाते हैं (1500 मीटर की ऊँचाई तक)।
- वन्यजीव बोर्ड: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 6 के तहत राज्य वन्यजीव बोर्ड गठन का प्रावधान है।
ताल, कुंड एवं जलप्रपात (फॉल्स)
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ताल व कुंड:
- काँसरो ताल: राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के मध्य रायवाला के समीप।
- चन्दबाड़ी ताल: देहरादून में स्थित।
- गौतम कुंड: चन्द्रबनी, देहरादून।
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प्रमुख जलप्रपात:
- टाइगर फॉल: चकराता (ऊँचाई: 50 मीटर)।
- मोइगाड फॉल: चकराता।
- किमोना फॉल: चकराता (ऊँचाई: 35 मीटर)।
- शिखर फॉल: राजपुर, देहरादून।
- मैसी जलप्रपात: मसूरी के पास।
- पटना जलप्रपात: ऋषिकेश (पौड़ी जिला)।
- नीरगढ़्डू झरना: ऋषिकेश (टिहरी जिला)।
- गरुड़ चट्टी प्रपात: नीलकंठ मार्ग (पौड़ी जिला)।
- फूलचट्टी झरना: ऋषिकेश।
[ देहरादून के मंदिर, मेले एवं त्योहार ]
देहरादून जनपद के प्रसिद्ध मंदिर
- साईं दरबार मंदिर: यह राजपुर रोड पर स्थित है।
- गुरूद्वारा नानकसर: इसका निर्माण 1973 ई. में गुरुदेव सिंह के संरक्षण में रायपुर में हुआ था।
- संतला देवी का मंदिर: गढ़ीकैंट, देहरादून में स्थित है।
- श्री प्रकाशेश्वर महादेव: यह मंदिर कुठाल गेट में स्थित है।
- तपोवन मंदिर: इसे 'रुद्रेश्वर शिव मंदिर' कहा जाता है, जहाँ गुरु द्रोणाचार्य ने तपस्या की थी।
- चन्द्रबनी मंदिर: यह परवादून परगने में है, यहाँ महर्षि गौतम ने तपस्या की थी।
- दुधा धारी काली मंदिर: तपोवन क्षेत्र में स्थित है।
- डाटकाली मंदिर: लोग नए वाहन खरीदते समय यहाँ आशीर्वाद लेने आते हैं; निर्माण 1804 ई. में हुआ।
- मालदेवता मंदिर: यहाँ भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का निर्माण गोरखा शासकों ने किया था।
- इस्कॉन टेम्पल: कांवली रोड, देहरादून में स्थित है।
- श्री परशुराम मंदिर: खुड़बुड़ा मोहल्ला, देहरादून में स्थित है।
बुद्धा टेम्पल (Buddha Temple)
- स्थान: क्लेमेनटाउन में स्थित आकर्षक स्तूप है जो मंड्रोलिंग मठ के रूप में प्रसिद्ध है।
- प्रतिमा: यहाँ भगवान बुद्ध की 103 फीट ऊँची प्रतिमा है।
- स्थापना: 28 अक्टूबर 2002 को तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने इसका उद्घाटन किया।
- ऊँचाई: स्तूप की ऊँचाई लगभग 185 फीट है और यह पाँच मंजिला है।
प्रमुख त्योहार व मेले
- टपकेश्वर मेला: देवधारा नदी के किनारे गुफा में स्थित शिव मंदिर में शिवरात्रि के दिन लगता है।
- नुणाई मेला: जौनसार क्षेत्र में भेड़-बकरियों को पालने वालों के नाम से मनाया जाता है।
- बिस्सू मेला: चकराता तहसील के जौनसार भाबर क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
- जखोली मेला: जौनसार क्षेत्र में लगता है।
- गनियात मेला: जौनसार भाबर में लगता है।
- झण्डा मेला: देहरादून में गुरु रामराय दरबार साहिब में लगता है।
- शहीद वीर केसरी चंद मेला: 3 मई को चोलीथात में इनके बलिदान दिवस पर लगता है।
- गोगा की जातरा: जौनसार-भाबर में विषुवत संक्रांति के अवसर पर होती है।
श्री गुरु रामराय दरबार साहिब
- स्थापना: गुरु रामराय ने धामवाला में मुगल शैली में झण्डा दरबार की स्थापना की।
- पूर्ण निर्माण: झण्डा दरबार गुरुद्वारे का निर्माण 1707 ई. में गुरु रामराय की पत्नी पंजाब कौर ने पूर्ण कराया।
- मेला: गुरु रामराय के जन्म दिवस व आगमन पर झण्डा मेला लगता है जो लगभग 15 दिनों तक चलता है।
- एजुकेशन मिशन: 1952 में महंत इन्द्रेश चरण दास जी द्वारा इसकी शुरुआत की गई।
[ देहरादून जनपद के प्रमुख पर्यटक स्थल ]
- गुच्छूपानी: इसे रोवर्स केव के नाम से जाना जाता है, यह डाकुओं की गुफा भी कहलाती है।
- भागीरथी रिसॉर्ट्स: सेलाकुई में स्थित पिकनिक स्पॉट है।
- फन वैली: हरिद्वार मार्ग पर स्थित रोमांचकारी खेलों का केंद्र।
- हैप्पी वैली: दलाई लामा तिब्बत से निर्वासित होकर सबसे पहले यहीं रुके थे।
- लच्छीवाला: डोईवाला में स्थित प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट।
- इन्दिरा मार्केट: पलटन बाजार, राजपुर मार्ग पर स्थित।
देहरादून चिड़ियाघर (Dehradun Zoo)
- पुराना नाम: इसका पुराना नाम मालसी डियर पार्क था।
- उपलब्धि: फेसबुक द्वारा जारी रैंकिंग में इसे विश्व के 181 चिड़ियाघरों में 10वीं रैंकिंग मिली थी।
- विकास: 1976 में वन चेतना केंद्र के रूप में विकसित किया गया। 2018 में यहाँ कैक्टस पार्क की स्थापना की गई।
क्लॉक टॉवर (घण्टाघर)
- नींव: 24 जुलाई 1948 को सरोजनी नायडू ने रखी थी।
- उद्घाटन: अक्टूबर 1953 में लाल बहादुर शास्त्री जी ने किया।
- अन्य नाम: इसे बलबीर टॉवर भी कहा जाता है और यह षट्भुजाकार (6-sided) है।
जौनसार का लाखामंडल
- विवरण: इसका वर्णन जेम्स बेली फ्रेजर की पुस्तक 'द हिमालया माउंटेन्स' (1814-15 ई.) में मिलता है।
- स्थान: यह यमुना और रिखनाड नदी के संगम पर स्थित है।
- इतिहास: यहाँ महाभारत कालीन लाक्षागृह के अवशेष और मूर्तियों का भण्डार मिलता है।
- स्थापत्य: यहाँ उत्तराखण्ड शैली का प्राचीन शिव मंदिर है। इसके शिवलिंग पर जल डालने पर अपना प्रतिबिंब देखा जा सकता है।
- पुराना नाम: लाखामंडल का पुराना नाम मढ़ था।
[ पहाड़ों की रानी : मसूरी ]
- मसूरी को गंगोत्री एवं यमुनोत्री मंदिरों का प्रवेश द्वार एवं पहाड़ों की रानी कहा जाता है। समुद्र तल से मसूरी की ऊँचाई 2005 मीटर एवं मसूरी का क्षेत्रफल 65 वर्ग किमी है। पहाड़ों की रानी मसूरी मध्य हिमालय श्रेणी के अन्तर्गत आती है।
- 1820 ई. में सुदर्शन शाह द्वारा मसूरी की वर्तमान भूमि 80 वर्षों के लिए पट्टे पर दी गयी थी।
- मसूरी का नामकरण यहाँ बहुतायत उगने वाले मंसूर पौधे के कारण हुआ।
- मसूरी में बनी पहली इमारत मलिंगार होटल था।
- मसूरी शहर की स्थापना 1823 ई. में एक अंग्रेज कैप्टन यंग द्वारा कैमल्स बैक पर एक छोटी सी झोपड़ी बनाने से की गयी थी।
- 1829 ई. में लॉरेंस नामक अंग्रेज ने मसूरी में परचून की दुकान खोली।
- मसूरी में प्रथम स्कूल कॉन्वेंट ऑफ जीजस एंड मैरी की स्थापना 1845 में हुई।
- मसूरी में पहले क्राइस्ट चर्च की स्थापना 1836 को कैप्टन रेनी टेलर ने की जो गोथिक शैली का बना हुआ है, जिसके आँगन में 1906 ई. को वेल्स राजकुमारी क्वीन मैरी ने देवदार का वृक्ष लगाया था।
- मसूरी नगरपालिका परिषद का गठन 1842 ई. में हुआ जो राज्य की सबसे पुरानी नगरपालिका परिषद है।
- तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने 1959 ई. में मसूरी में शरण ली थी लेकिन बाद में वे हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में बस गये थे।
- सेंट पोल्स चर्च मसूरी की आधारशिला बिशप डैनियल विल्सन ने रखी थी।
- मसूरी की दूसरी सबसे ऊँची चोटी गनहिल पहाड़ी है जबकि मसूरी की सबसे ऊँची चोटी लाल टिब्बा है।
- मसूरी रोपवे 1970 ई. में बना था।
- मसूरी टीवी टावर 1975 में बना और 1977 से काम शुरू हुआ।
- मसूरी नगर पालिका द्वारा सितम्बर 2009 से इको टैक्स वसूला जा रहा है।
मसूरी को पूर्ण तहसील का दर्जा
- 3 अगस्त 2023 को उत्तराखण्ड कैबिनेट ने मसूरी को पूर्ण तहसील बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। ब्रिटिश काल के समय यह मेरठ कमिश्नरी से संचालित की जाती थी। 1850 में अंग्रेजों ने प्रशासनिक ढाँचे को सुव्यवस्थित करने के लिए मसूरी सिटी बोर्ड का गठन किया था।
मसूरी में दर्शनीय स्थल
- विश्व में स्विट्जरलैंड के अलावा मसूरी में विंटरलाइन का मनोरम दृश्य जनवरी माह में दिखता है।
- हैप्पी वैली मसूरी में तिब्बती लोग बसे हैं।
- मसूरी के पास भट्टा, हार्डी प्रपात एवं झड़ी पानी स्थित है।
- मसूरी के 3 किमी लम्बी कैमल बैक रोड को माल रोड कहते हैं।
- मसूरी का सबसे पुराना बाजार लण्डौर है जिसका निर्माण 1828 ई. को प्रारंभ हुआ था तथा 1832 में भारत के सर्वेयर जनरल जॉर्ज एवरेस्ट ने यहाँ अपना कार्यालय खोला था। कुलड़ी बाजार भी मसूरी में है।
- सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस, क्लाउड एंड, तिब्बती स्तूप, वन चेतना केन्द्र, कैम्पटी फॉल मसूरी के दर्शनीय स्थल हैं।
- मसूरी में नागदेवता का मंदिर है।
- मसूरी में ज्वालाजी का मंदिर विनोग पहाड़ी पर स्थित है।
- संतरा देवी का मंदिर मसूरी-कैम्पटी फॉल मार्ग पर है।
- मसूरी में म्युनिसिपल गार्डन या कंपनी गार्डन का निर्माण फाकनर लोगी ने किया, इसका आजादी से पहले नाम बोटेनिकल गार्डन था।
मसूरी में प्रमुख संस्थान
- वुडस्टाक स्कूल की स्थापना 1901 ई. में मसूरी में हुई।
- सेंट जॉर्ज कॉलेज 1853 ई. को मसूरी में स्थापित हुआ था।
- मसूरी इंटरनेशनल स्कूल की स्थापना 1984 ई. में हुई।
- वाइन वर्ग एलन स्कूल मसूरी में है।
- प्रौद्योगिकी प्रबंधन संस्थान (ITM) मसूरी में डीआरडीओ का प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान 1962 ई. से है।
- मसूरी में दो ऐतिहासिक पुस्तकालय हैं जिनमें मसूरी स्टेशन लाइब्रेरी की स्थापना 1843 ई. में एवं तिलक लाइब्रेरी की स्थापना 1920 ई. में हुई थी।
- चन्द्रकुंवर बर्त्वाल शोध पीठ मसूरी में स्थित है।
- मसूरी में अम्बर चरखा केन्द्र की स्थापना श्रीमती ताराप्रकाश ने की।
[ पहाड़ों का राजा : चकराता ]
- चकराता उत्तराखण्ड में जौनसार-बावर क्षेत्र के अन्तर्गत आता है जो देहरादून जिले की एक तहसील है। चकराता का प्राचीन नाम एक चक्रा है।
- चकराता की स्थापना कर्नल ह्यूम ने की, इनका सम्बन्ध ब्रिटिश सेना के 55 रेजीमेंट से था।
- देवन और रामताल गार्डन चकराता के समीप पिकनिक स्थल हैं।
- काणासर घने जंगलों से युक्त पर्यटन स्थल चकराता के समीप है।
- चिलमरी नेक चोटी चकराता में है।
- थाना डांडा चोटी देहरादून के चकराता में स्थित है।
- मिओला टिब्बा या बुधेर टिब्बा चकराता में स्थित है।
- बुधेर गुफा की खोज जर्मन नागरिक मिओला ने की, इस कारण इसे मेओला गुफा भी कहा जाता है।
- बीसपुरिया गुफा चकराता में स्थित है।
- मुंडाली नामक पर्यटक स्थल चकराता में स्कीइंग के लिए प्रसिद्ध है।
- कैराना पहाड़ी एवं खतनु नदी चकराता में स्थित है।
- हथिनी कुंड चकराता में स्थित है।
- बैराट गढ़ चकराता से 15 से 16 किमी की दूरी पर चोरानी चोटी पर स्थित है। यह स्थान महाभारत काल में पुलिंद राजा विराट की राजधानी थी।
- चिन्ताहरण महादेव मंदिर चकराता में स्थित है।
- बालनी देवी का मंदिर चकराता में स्थित है।
- क्वानू मेला चकराता में दीपावली के अवसर पर लगता है।
- हनोल टोंस नदी के तट पर जौनसार-बावर वासियों का सबसे बड़ा तीर्थस्थल है। हनोल में महासू देवता का मंदिर है।
- पवासी देवता का मंदिर थडियार में स्थित है जो कि टोंस नदी के तट पर है।
[ संत नगरी - ऋषिकेश ]
- ऋषिकेश गंगा एवं चन्द्रभागा नदी के संगम पर स्थित है जिसे केदारखण्ड में कुब्जाम्रक कहा गया है। यह देहरादून का एक उपनगर है।
- किंवदंती के अनुसार ऋषिकेश में रैभ्य ऋषि ने तपस्या कर ईश्वर को प्राप्त किया, इसलिए यहाँ का नाम हृषिकेश पड़ा था, लेकिन वर्तमान में उच्चारण दोष के कारण ऋषिकेश नाम हो गया।
- कश्मीर के राजा ललितादित्य मुक्तापीड़ ने ऋषिकेश में अनेक मंदिरों का निर्माण कराया था।
- ऋषिकेश को संतनगरी एवं विश्व योग की राजधानी कहा गया है।
- केन्द्र सरकार ने ऋषिकेश और हरिद्वार को भारत के प्रथम जुड़वा राष्ट्रीय विरासत शहरों का खिताब दिया।
- ऋषिकेश 3 जिलों की सीमा से लगा हुआ है – टिहरी, पौड़ी, देहरादून।
- ऋषिकेश में चारों भाई राम, लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न के मंदिर हैं।
- ऋषिकेश नगर पालिका 1952 में बनी एवं अक्टूबर 2017 में ऋषिकेश को नगर निगम बनाया गया।
- ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला 140 मी. लम्बा है, यह एक भ्रमण स्थल है यहाँ लक्ष्मण जी का मंदिर भी है। यह स्थान टिहरी जिले में आता है।
- पहले लक्ष्मण झूला के स्थान पर जूट रोप ब्रिज था जो 1924 ई. की बाढ़ में टूटने के बाद पुनः निर्माण 1930 ई. में किया गया।
- 1986 ई. में ऋषिकेश के शिवानंद आश्रम के पास राम झूला बनाया गया।
- स्वर्ण आश्रम की स्थापना स्वामी विशुद्धानंद ने की जिन्हें काली कमलीवाला संत भी कहा जाता है।
- बीटल्स आश्रम या महर्षि महेश योगी आश्रम ऋषिकेश में है।
- गीता भवन ऋषिकेश में गंगा नदी के तट पर स्थित है।
- ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट में तीन नदियों के संगम की मान्यता है।
- नीलकंठ महादेव का मंदिर ऋषिकेश (पौड़ी जिले) में स्थित है यहाँ शम्भु एवं निशम्भु नामक पर्वत हैं।
- कैलाश निकेतन मंदिर ऋषिकेश के (पौड़ी जिले) में पड़ता है, यह 13 मंजिला भवन है।
- ऋषिकेश का सबसे पुराना मंदिर भरत मंदिर है, भरत मंदिर त्रिवेणी घाट के समीप है।
- 84 कुटिया की स्थापना 1967 ई. में महर्षि योगी द्वारा ध्यान हेतु की गयी थी।
- 1985 से यह केंद्र (84 कुटिया) बंद था किंतु 8 दिसम्बर 2015 में राज्य सरकार की पहल पर इसे खोला गया। यहाँ जाने हेतु पर्यटकों को प्रवेश शुल्क देना पड़ता है।
- ऋषिकेश में कोडियाला एवं शिवपुरी स्थल गंगा तट पर रिवर राफ्टिंग के लिए प्रसिद्ध हैं। ऋषिकेश में क्लिफ जंपिंग साहसिक पर्यटक स्थल ब्रह्मपुरी है।
- ऋषि कुंड नामक कुंड ऋषिकेश में है।
- ऋषिकेश में हर्बल गार्डन टिहरी के मुनि की रेती में स्थित है।
- हिन्दुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड ऋषिकेश में स्थित है।
- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की नींव 2004 में ऋषिकेश में तत्कालीन केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सुषमा स्वराज ने रखी थी।
- ऋषिकेश में गंगा नदी पर एशिया का दूसरा एवं देश का पहला केबल सस्पेंशन ग्लास ब्रिज का निर्माण प्रस्तावित है जिसे बजरंग सेतु नाम दिया गया है।
[ देहरादून जनपद सम्बन्धी विविध ]
- देहरादून में आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय की स्थापना 2009 में की गयी।
- देहरादून में 2007 से सिल्क पार्क का निर्माण कार्य प्रारम्भ हुआ।
- राज्य का पहला वॉर मेमोरियल देहरादून के चीड़बाग क्षेत्र में बनाया गया जिसकी आधारशिला 2016 में रखी गयी थी।
- इन्दिरा अम्मा कैंटीन की शुरुआत 2015 में देहरादून में की गयी।
- देहरादून इको सेंसिटिव जोन में 1996 ई. में शामिल किया गया।
- शहीद दुर्गमल्ल योग पार्क का गढ़ीकैंट देहरादून में स्थित है।
- देहरादून में तार सेवा का प्रारम्भ 1865 ई. में हुआ।
- सहस्त्रधारा में गंधकयुक्त जल मिलता है।
- उत्तराखण्ड स्टेट ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी 2006 से देहरादून में है।
- महादेवी कन्या पाठशाला की स्थापना श्रीमती महादेवी भटनागर द्वारा 15 सितम्बर 1902 ई. में 6 छात्राओं के साथ देहरादून में की गयी थी।
- राज्य का प्रथम महिला इंजीनियरिंग कॉलेज सुद्धोवाला देहरादून में है।
- उत्तराखण्ड का प्रथम सैनिक स्कूल देहरादून में है।
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम एवं इंस्टीट्यूट ऑफ ड्रिलिंग टेक्नोलॉजी देहरादून में है।
- सचिवालय प्रशिक्षण एवं प्रबंध संस्थान देहरादून में है।
- ई. प्रीजन कारागार देहरादून के सुद्धोवाला में स्थित है।
- आईएसओ (ISO) प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाला उत्तराखण्ड का प्रथम मिष्ठान भंडार कुमार स्वीट शॉप देहरादून में है।
- देहरादून का क्लेमेंट टाउन नगर 1936 में इटली के फादर क्लेमेन्टा ने बसाया।
- देहरादून के हिमाचल बॉर्डर में स्थित त्यूनी शहर का प्राचीन नाम गुदियाखाटल था।
- राजपुर, प्रेमनगर, रायवाला, रायपुर, डालनवाला, डोईवाला, क्लेमेंट टाउन आदि देहरादून जिले के उपनगर हैं।
- भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने देहरादून जनपद को साइंस सिटी का दर्जा दिया।
- देहरादून के रिसपना नदी पर बने पुल का नाम स्वामी दयानंद सरस्वती सेतु रखा गया है।
- देहरादून में रिसपना नदी का दर्द प्रधानमंत्री तक पहुँचाने का श्रेय 2017 में गायत्री को जाता है, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में किया था।
- दुनिया का प्रथम प्राकृतिक धरोहर केंद्र मार्च 2018 में देहरादून के भारतीय वन्यजीव संस्थान में खोला गया।
- 2018 में देहरादून के आईटी पार्क में देश का पहला ड्रोन एप्लीकेशन रिसर्च सेंटर व साइबर सिक्योरिटी सेंटर का उद्घाटन किया गया।
- महिलाओं के साथ छेड़-छाड़ को रोकने के लिए देहरादून पुलिस ने ऑपरेशन पिंक अभियान चलाया था।
- उत्तराखण्ड के प्रथम विधि विश्वविद्यालय एवं देश के 22वें विधि विश्वविद्यालय की आधारशिला मार्च 2019 में ऋषिकेश के रानीपोखरी में रखी गयी।
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 17 अक्टूबर 2021 को प्रीतम भरतवाण जागर ढोल इंटरनेशनल अकादमी का शुभारम्भ देहरादून में किया।
- ऋषिकेश के तहसील चौक का नाम अब पर्यावरणविद गौरा देवी के नाम पर रखा गया।
[ देहरादून में सरकारी संस्थान व विभाग ]
- उत्तराखण्ड के प्रथम साइबर थाने की स्थापना 2015 में देहरादून में की गयी।
- विज्ञानधाम या साइंस सिटी झाझरा देहरादून में स्थित है।
- मानसिक रोग संस्थान सेलाकुई देहरादून में स्थित है।
- महात्मा गांधी शताब्दी नेत्र विज्ञान केन्द्र देहरादून में स्थित है।
- राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (सिडकुल) 2002 से देहरादून में है।
- भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण विभाग देहरादून में है।
- भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग देहरादून में 2003 से है।
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम देहरादून में है।
- राष्ट्रीय दृष्टिबाधित संस्थान की स्थापना 1943 ई. में देहरादून में हुई।
- भारतीय खान ब्यूरो की एक शाखा देहरादून में है।
- भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान या इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (IIRS) हाथीबड़कला देहरादून में है, इसकी स्थापना 1966 में की गयी।
- वाईल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया या भारतीय वन्य जीव संस्थान (WII) चंद्रबनी देहरादून में है, इसकी स्थापना 1982 में हुई।
- आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबन्ध केन्द्र देहरादून में स्थित है।
- इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी 1938 में देहरादून में स्थापित की गयी।
- उत्तराखण्ड पशुधन विकास बोर्ड देहरादून में है।
- भातखण्डे हिन्दुस्तानी संगीत महाविद्यालय की स्थापना देहरादून में हुई, इसके अन्तर्गत देहरादून, अल्मोड़ा एवं पौड़ी में तीन परिसरों की स्थापना की गयी।
- पर्वतीय विकास योजना के अन्तर्गत 1980 ई. में देहरादून में क्षेत्रीय अभिलेखागार की स्थापना की गयी।
- 15 अक्टूबर 2003 को क्षेत्रीय अभिलेखागार देहरादून को राज्य अभिलेखागार उत्तराखण्ड का दर्जा प्रदान किया गया।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान देहरादून में है।
- मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) की स्थापना 1984 में हुई।
- वर्षा जल के संग्रहण हेतु प्रथम प्रयास उत्तराखण्ड जल संस्थान मुख्यालय, "जल भवन" देहरादून में किया गया है।
- उत्तराखण्ड वन विभाग राजपुर रोड देहरादून में स्थित है।
- राज्य महिला आयोग सुद्धोवाला देहरादून में स्थित है, जिसकी स्थापना महिला आयोग अधिनियम 2005 के तहत हुई।
- भारतीय मानक ब्यूरो का एक कार्यालय देहरादून में है।
- राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन अजबपुर कला देहरादून में है।
- उत्तराखण्ड राज्य जैवविविधता बोर्ड का गठन 2006 को बल्लीवाला देहरादून में हुआ।
- राष्ट्रपति आशियाना देहरादून के राजपुर रोड में बना, जिसका पुराना नाम बॉडीगार्ड भवन था।
- उत्तराखण्ड का सबसे पुराना वन संग्रहालय (1914) देहरादून में है।
- संस्कृति साहित्य एवं कला परिषद का गठन सन् 2004 में देहरादून में किया गया।
- राज्य में नाट्य कला के विकास के लिए देहरादून एवं अल्मोड़ा में रंगमण्डल की स्थापना की गयी।
- ऑयल एण्ड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) की स्थापना 1956 ई. में देहरादून में की गयी।
- देहरादून के ओएनजीसी में देश का पहला ऑयल म्यूजियम का उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने 14 अगस्त 2005 में किया।
- उत्तराखण्ड राज्य अवस्थापना विकास निगम लिमिटेड पटेलनगर देहरादून में स्थित है।
- केन्द्रीय मृदा जल संरक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान देहरादून में है।
- गो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, पशुलोक, ऋषिकेश में स्थित है।
उत्तराखण्ड भाषा संस्थान
- उत्तराखण्ड भाषा संस्थान की स्थापना उत्तराखण्ड भाषा संस्थान नियमावली 2009 के अन्तर्गत उत्तराखण्ड शासन की अधिसूचना दिनांक 10 फरवरी 2010 से हुई।
- उत्तराखण्ड हिन्दी अकादमी की स्थापना नियमावली 2009 के अन्तर्गत 11 फरवरी 2010 से हुई।
- उत्तराखण्ड उर्दू अकादमी की स्थापना 22 जुलाई 2013 को उत्तराखण्ड उर्दू अकादमी नियमावली 2013 के अन्तर्गत की गई।
- उत्तराखण्ड पंजाबी अकादमी की स्थापना 22 जुलाई 2013 को उत्तराखण्ड पंजाबी अकादमी नियमावली 2013 के अन्तर्गत की गई।
- उत्तराखण्ड लोकभाषा व बोली अकादमी की स्थापना 10 अगस्त 2016 में हुई।
- उत्तराखण्ड भाषा संस्थान अधिनियम 2018 के तहत विभिन्न अकादमियों का एकीकरण कर भाषा संस्थान के अन्तर्गत किया गया।
हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट
- हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट की स्थापना 1989 ई. में जॉलीग्रांट में की गयी। हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट राज्य का प्रथम मेडिकल कॉलेज है, इसे 2007 में डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया।
अन्य महत्वपूर्ण स्थल
- अश्वमेघ यज्ञ स्थल: देहरादून जनपद के बाड़वाला में एक प्राचीन यज्ञ स्थल है जो पुरातत्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहाँ एक प्राचीन व भव्य बरगद का पेड़ है।
- बैराटगढ़: यह स्थान चकराता के निकट स्थित है, इस क्षेत्र के राजा विराट के कारण ही इसका नाम बैराटगढ़ पड़ा।
- कोटी कनासर: यह स्थान चकराता-त्यूनी मोटरमार्ग पर स्थित है। यहाँ एशिया का सबसे बड़ा तथा मोटा देवदार का वृक्ष स्थित है।
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