➤उत्तरकाशी जनपद की भौगोलिक स्थिति
- उत्तरकाशी जनपद उत्तराखण्ड राज्य का सबसे उत्तरी जनपद है, इसका क्षेत्रफल 8016 वर्ग किमी है।
- क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तराखण्ड का दूसरा सबसे बड़ा जिला है।
- उत्तरकाशी वरुणावत पर्वत की तलहटी में भागीरथी नदी के किनारे बसा है।
- उत्तरकाशी जिले की सीमाएं चीन एवं हिमाचल प्रदेश से लगती हैं।
- उत्तरकाशी जनपद से 4 जिलों की सीमाएं लगती हैं— देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग एवं चमोली।
उत्तरकाशी जनपद का इतिहास
- पुराणों में उत्तरकाशी को सौम्य काशी कहा गया है एवं प्राचीन काल में उत्तरकाशी को बाड़ाहाट कहा जाता था।
- ह्वेनसांग ने उत्तरकाशी के लिए शत्रुघ्न कहा।
- विश्वनाथ मंदिर के कारण जनपद का नाम उत्तरकाशी पड़ा।
- देवढुंगा, पुरोला से कुणिन्द शासक अमोघभूति की यज्ञ वेदिका प्राप्त हुई।
- उत्तरकाशी जनपद परमार वंश या पंवार वंश के अधीन रहा, लेकिन 1803 ई० से 1815 ई० तक गोरखों के अधीन रहा था।
- गढ़वाल में 1803 ई० में आये भूकम्प के कारण भागीरथी नदी ने अपनी धार बदली थी।
- रंवाई परगना को 1824 ई० में टिहरी रियासत में शामिल किया गया।
- टिहरी जिले से काटकर उत्तरकाशी जनपद की स्थापना 24 फरवरी 1960 ई० में की गयी।
उत्तरकाशी जनपद के प्रमुख दर्रे
- उत्तरकाशी एवं हिमाचल प्रदेश के बीच श्रृंगकंठ दर्रा है, यह 1500 मी की ऊँचाई पर स्थित है।
- थांगला दर्रा उत्तरकाशी व तिब्बत के बीच संकरा मार्ग है, यह 6,079 मी ऊँचाई पर स्थित है।
- उत्तरकाशी व चमोली के बीच कालिंदी दर्रा है।
- नेलंग दर्रा उत्तरकाशी व तिब्बत के बीच में पड़ता है।
- मुलिंगला दर्रा एवं सागचोकला दर्रा उत्तरकाशी से तिब्बत के बीच संकरा मार्ग जाता है।
- हर की दून और किन्नौर घाटी के बीच प्राचीन काल में बरासू दर्रे से व्यापार होता था।
- बाली पास या दर्रा यमुनोत्री उत्तरकाशी में स्थित है।
- ऑडेन कार्ल दर्रा उत्तरकाशी एवं भिलंगना घाटी को जोड़ता है।
उत्तरकाशी जनपद की प्रमुख घाटियां
- भैरव घाटी उत्तरकाशी के भटवाड़ी में स्थित है।
- रंवाई के हर-की दून क्षेत्र में वारसू घाटी है।
- मांझी वन फूलों की घाटी उत्तरकाशी में है।
- उत्तरकाशी जनपद की नेलंग घाटी को पहाड़ का रेगिस्तान कहा जाता है।
- नेलंग घाटी को उत्तराखण्ड का लद्दाख कहा जाता है।
- बासपा घाटी हर्षिल उत्तरकाशी में स्थित है।
- टोंस घाटी व कमल नदी घाटी उत्तरकाशी जनपद में स्थित है।
- नंदनवन घाटी व यमुना घाटी उत्तरकाशी जनपद में स्थित है।
- रामा सेराई घाटी एवं रक्तवन घाटी उत्तरकाशी जनपद में स्थित है।
- उजेली घाटी (संतों की घाटी) उत्तरकाशी जनपद में स्थित है।
उत्तरकाशी के हिमनद/ग्लेशियर
- गंगोत्री ग्लेशियर राज्य का सबसे बड़ा हिमनद है, इसकी लम्बाई 30 किमी एवं चौड़ाई 2 किमी है।
- डोकरियानी हिमनद उत्तरकाशी में स्थित है।
- बंदरपूंछ ग्लेशियर 12 किमी लम्बा हिमनद यमुनोत्री (उत्तरकाशी) में है।
- कीर्ति ग्लेशियर, चतुरंगि ग्लेशियर एवं मेंदी ग्लेशियर उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं।
- छांग-थांग ग्लेशियर और रक्तवन ग्लेशियर उत्तरकाशी जनपद में स्थित हैं।
- रक्तवन ग्लेशियर क्षेत्र की चार चोटियों का नाम अटल-1, अटल-2, अटल-3 एवं अटल-4 रखा गया।
- स्वछंद ग्लेशियर उत्तरकाशी में 7 किमी लम्बा है।
- गनोहिम ग्लेशियर उत्तरकाशी जिले में 6 किमी लम्बा है।
- ज्योधार ग्लेशियर, सियार ग्लेशियर, चारण ग्लेशियर, बारटीयाखो व बामक ग्लेशियर उत्तरकाशी की यमुना घाटी में स्थित हैं।
उत्तरकाशी जनपद में अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- केदारकांठा बुग्याल उत्तरकाशी में है।
- गोमुख के समीप केदार खर्क स्थित है।
- यमुनोत्री के निकट देवदामिनी बुग्याल है।
- पुष्पहारा बुग्याल उत्तरकाशी में स्थित है।
- चांईशील बुग्याल उत्तरकाशी में है।
- देवक्यारा बुग्याल को 2019 में 'ट्रैक ऑफ द ईयर' चुना गया।
- रुपनील सौंड़ बुग्याल उत्तरकाशी में है।
- हनुमान चट्टी के समीप उत्तरकाशी बुग्याल है।
- उत्तरकाशी के अन्य बुग्याल - बरासू, मानैर, हरुंता, सुकुला और (छायागाड) बुग्याल, मानेग बुग्याल।
- दयारा बुग्याल: रैथल और बारसू गाँवों से आगे है। शीतकाल में स्कीइंग प्रशिक्षण एवं दिव्य आशा के लिए जाना जाता है। इस बुग्याल का मुख्य आधार शिविर से 6 किमी की पैदल दूरी पर है। रैथल एक प्राचीन गाँव है जो अपनी कृषि और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
- दयारा बुग्याल को विश्व मानचित्र पर लाने का श्रेय चन्द्रप्रभा ऐतवाल को जाता है।
- शीतकाल में दयारा बुग्याल में मक्खन की होली खेली जाती है इसे 'अन्दूड़ी उत्सव' या 'बटर फेस्टिवल' कहते हैं। यह भाद्रपद के महीने में मनाया जाता है।
- मक्खन की होली को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय चन्दन सिंह राणा का है।
उत्तरकाशी के प्रमुख पर्वत
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पर्वत शिखर |
ऊँचाई |
पर्वत शिखर |
ऊँचाई |
|---|---|---|---|
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भागीरथी पर्वत |
6856 मी |
श्रीकंठ पर्वत |
6,728 मी |
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गंगोत्री पर्वत |
6,672 मी |
यमुनोत्री पर्वत |
6400 मी |
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बंदरपूंछ पर्वत |
6,320 मी |
जैलंग पर्वत |
5,871 मी |
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मेरू पर्वत |
6,660 मी |
सुमेरू पर्वत |
6,350 मी |
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खुन्टा पर्वत |
— |
त्रिमुखी पर्वत |
— |
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श्रीकांत पर्वत |
— |
भृगु पर्वत |
— |
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कीर्तिस्तम्भ |
— |
थैलू पर्वत |
— |
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सुदर्शन पर्वत |
6507 मी |
वासुकी पर्वत |
6792 मी |
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कोटेश्वर पर्वत |
— |
थलैया सागर |
6904 मी |
उत्तरकाशी जनपद में पर्वत श्रेणी
- कलिंग पर्वत बंदरपूंछ पर्वत श्रेणी का हिस्सा है, जबकि बंदरपूंछ तीन हिमनद (श्रीकंठ, बंदरपूंछ एवं यमुनोत्री कांठा) का सामूहिक नाम है।
- स्वर्गारोहिणी पर्वत चमोली एवं उत्तरकाशी में पड़ता है, इसकी ऊँचाई 6252 मी है।
- थलैय सागर पर्वत थलैया शिखर व शिवलिंग शिखर के बीच में है।
- उत्तरकाशी का शिवलिंग शिखर स्विस आल्प्स पर्वत के प्रसिद्ध अल्पाइन शिखर के समान है।
- शिवलिंग शिखर को 'हिमालय का मैटरहॉर्न' भी कहा जाता है।
- फतेह पर्वत के नजदीक यमुनोत्री क्षेत्र में 'हर-की दून' है।
- भैरोंझाप पहाड़ उत्तरकाशी में है।
- राड़ी का डांडा बड़कोट और द्रोपदी का डांडा उत्तरकाशी में स्थित है।
- योगिन चोटी उत्तरकाशी जिले में पड़ती है।
- कालानाग या काली चोटी यमुनोत्री में स्थित है।
उत्तरकाशी जनपद की प्रसिद्ध गुफाएं
- प्रकटेश्वर गुफा उत्तरकाशी के ब्रह्मखाल में स्थित है। (नोट: हस्तलिखित सुधार के अनुसार प्रकटेश्वर मंदिर हे-दून में है)।
- पांडव गुफा उत्तरकाशी गंगोत्री में स्थित है।
- मातंग ऋषि गुफा मातली उत्तरकाशी में स्थित है।
- शृंगी गुफा उत्तरकाशी के मोरी विकासखण्ड में स्थित है।
- सिमलसारी गुफा उत्तरकाशी जिले में स्थित है।
कृषि व पशुपालन
- राज्य में सर्वाधिक सेब का उत्पादन उत्तरकाशी जिले में होता है।
- राज्य में उत्पादित सेब को दिल्ली में न्यूजीलैंड ब्रांड नाम से एवं अन्य राज्यों में हिमाचली सेब के नाम से बेचा जाता है।
- उत्तरकाशी जिले में अखरोट का उत्पादन भी किया जाता है।
- लाल चावल के उत्पादन के लिए रामा सिराई घाटी प्रसिद्ध है।
उत्तरकाशी जनपद में प्रमुख मेले
- सेल्कू उत्सव उत्तरकाशी के मुखवा, सुखी-झाला आदि स्थानों में लगता है, जो भागीरथी घाटी का प्रसिद्ध उत्सव है।
- डुंडा उत्तरकाशी का लोसर मेला — यह नेलंग, जादुंग, बागौरी, तकनौर के मूल निवासी जाड़ लोगों द्वारा मनाया जाता है, यह मेला आटे की होली मेले के नाम से प्रसिद्ध है।
- डांडा देवराणा मेला नौगाँव में रुपेश्वर महादेव का मेला है।
- बौखनाग मेला रवाईं क्षेत्र में होता है।
- अतोड़ मेला उत्तरकाशी के नौगाँव में प्रति तीसरे वर्ष होता है, यह मेला मुख्यत: पशुपालन व्यवसाय से जुड़ा है।
- उत्तरकाशी में प्रतिवर्ष वारुणी पंचकोसी यात्रा भागीरथी व वरुणा (स्यामल गाड) के संगम पर स्नान करने के बाद शुरू होती है यात्री गंगाजल लेकर वरुणावत पर्वत की ओर चलते हैं वारुणी पंचकोसी यात्रा 15 किमी की पैदल यात्रा है (VDO-21)।
- हारदूद का मेला गंगोत्री मंदिर के पुजारियों के मुखवा गाँव में लगता है, यह मेला मुख्य रूप से नाग देवता से सम्बन्धित है।
- कण्डक मेला एवं नागराज देवता मेला उत्तरकाशी जिले में लगता है।
- पुरोला के रामासिराईं में कमलेश्वर महादेव का मेला लगता है।
- खरसाली का मेला यमुनोत्री में लगता है, जहाँ सोमेश्वर देवालय स्थित है।
- मोड़ी पूजा उत्तरकाशी-जौनपुर में पशुपालकों द्वारा श्रावण मास में मनाया जाने वाला त्योहार है।
- डुबड़ी उत्तरकाशी के जौनपुर-रवाईं क्षेत्र में वर्ष का प्रथम त्योहार होता है।
- उर थूणा उत्तरकाशी के जौनपुर में दीपावली के अवसर पर गाँव की रक्षा के लिए की जाने वाली बलि पूजा होती है।
- हिण्डोला व रेणुका मेले का आयोजन उत्तरकाशी जिले में किया जाता है।
- दीदी-भुली महोत्सव आयोजन — उत्तरकाशी।
बिस्सू मेला
- बिस्सू मेला उत्तरकाशी के टिकोंची, किरोली, मुताणु आदि गाँवों में लगता है। यह विषुवत संक्रान्ति के दिन लगने के कारण इसे बिस्सू मेला कहा जाता है।
- बिस्सू मेला धनुष बाण के रोमांचकारी युद्ध के कारण प्रसिद्ध है इस मेले में होने वाले क्रीड़ा युद्ध को स्थानीय भाषा में ठोटा खेलना कहते हैं और इस क्रीड़ा युद्ध में भाग लेने वाले कौतिक्यारे ठोटरी कहलाते हैं।
- देहरादून में चकराता तहसील के खुरूरी एवं जौनसार बावर क्षेत्र में भी बिस्सू मेला हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है।
सोमेश्वर मेला
- सोमेश्वर मेला उत्तरकाशी की विशेषता पेड पर तीर चलाना व परसा का कुल्हाड़ी पर नंगे पैर चलना है।
- सोमेश्वर को दुर्योधन का अवतार माना जाता है।
- सोमेश्वर देवता रवाईं घाटी से उपरीकोट मानुश रूप में आया था।
- सोमेश्वर या सोमेश्वर की पूजा मोरी ब्लॉक में भी होती है।
- सोमेश्वर देवता की स्तुति में गढ़वाल में कफुआ गाया जाता है, तथा बैंकु तमसु का सम्बन्ध सोमेश्वर देवता से है।
माघ मेला (बाड़ाहाट का थौल)
- माघ मेला (बाड़ाहाट का थौल) प्रतिवर्ष 14 जनवरी को लगता है।
- उत्तरकाशी में माघ मेला 7-8 दिनों तक आजाद मैदान में लगता है।
- माघ मेला का शुभारम्भ हरि महाराज का ढोल एवं कण्डार देवता की डोली के साथ होता है।
- माड़ाहाट शक्ति अभिलेख की लिपि ब्राह्मी है, इसमें नागवंशी राजा गणेश्वर और उसके पुत्र गुह के बारे में उल्लेख है।
उत्तरकाशी जनपद के प्रमुख मंदिर
- कुटेटी देवी का मंदिर उत्तरकाशी के ऐरावत पर्वत पर स्थित है।
- परशुराम का मंदिर भैरव चौक गली उत्तरकाशी में स्थित है जिसके दायें और अन्नपूर्णा देवी का मंदिर है।
- जयपुर मंदिर उत्तरकाशी के बस अड्डा के पास स्थित है यहाँ राजस्थान सरकार द्वारा संचालित जयपुर आश्रम है।
- कण्डार देवता का मंदिर उत्तरकाशी में है।
- कल्पकेदार मंदिर गंगोत्री मार्ग पर 240 मंदिर समूहों में से केवल एकमात्र मंदिर बचा हुआ है।
- कर्ण देवता का मंदिर मोरी नैटवार क्षेत्र में स्थित है।
- दुर्योधन का मंदिर रवाईं उत्तरकाशी में स्थित है।
- शनि देव का मंदिर यमुनोत्री के खरसाली में स्थित है।
- मंजियाली का सूर्य मंदिर कमल नदी के तट पर स्थित है, यह मंदिर पुष्पक शैली का बना हुआ है।
- बाल्खिला पर्वत पर स्थित नागणी माता का मंदिर उत्तरकाशी में है।
- रिंगाली देवी मंदिर उत्तरकाशी के डुंडा में है यह जाड़ भोटिया से संबंधित है।
- लक्षेश्वर महादेव मंदिर उत्तरकाशी में भागीरथी के तट पर है।
- कचडू देवता का मंदिर डुंडा उत्तरकाशी में है।
पोखू देवता मंदिर
- मोरी विकासखण्ड के नैटवाड गाँव में पोखू देवता का मंदिर स्थित है। पोखू देवता मंदिर में देवता दर्शन करना वर्जित है, मंदिर के पुजारी भी अपनी पीठ करके देवता की पूजा करते हैं।
- पोखू देवता को कर्ण का प्रतिनिधि एवं भगवान शिव का सेवक और न्याय का देवता कहा जाता है।
विश्वनाथ मंदिर
- विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी में कत्यूरी शैली का बना हुआ है।
- विश्वनाथ मंदिर का पुनरुद्धार 1857 ई० में सुदर्शन शाह की पत्नी महारानी खनेती ने किया था।
- विश्वनाथ मंदिर के ठीक सामने शक्ति मंदिर में लगभग 6 मी० ऊँचा एक विशाल त्रिशूल है।
गेंदुआ मेला
- गेंदुआ मेला उत्तरकाशी पुरोला के सिंगतुर पट्टी में लगता है।
- गेंदुआ के खेल में सिंगतुर पट्टी के लोग दो भागों में बंटे होते हैं, एक धड़ा पानसाई जो पांडवों के प्रतिनिधि होते हैं तथा दूसरा धड़ा साटी जो कौरवों के प्रतिनिधि होते हैं।
- उत्तरकाशी जनपद के यमुनोत्री क्षेत्र में दशगी घाटी का मौण मेला का आयोजन होता है।
- मछी मौण मेला छूला गाड़ में लगता है, छूला गाड़ उत्तरकाशी में भागीरथी नदी में मिल जाती है।
[उत्तरकाशी जनपद में पर्यटन व धार्मिक स्थल]
- जानकी चट्टी व हनुमान चट्टी यमुनोत्री के पास स्थित पर्यटक स्थल है जो प्राचीन काल में यात्रा मार्ग में विश्रामलाय थे।
- हनुमान चट्टी का प्राचीन नाम वैखानस तीर्थ है।
- ओसला नामक पर्यटक स्थल उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक में स्थित है।
- हर की दून पर्यटक स्थल रवाईं क्षेत्र में सुपिन नदी के बेसिन में स्थित है।
- हर की दून क्षेत्र के इष्ट देवता समसू हैं यहाँ समसू की पूजा दुर्योधन के रूप में होती है।
- हर्षिल उत्तरकाशी जिले में एक पर्यटक स्थल है इसे उत्तराखण्ड का मिनी स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है, इसका प्राचीन नाम हरि शिला है।
- हर्षिल क्षेत्र में सेब के बागान लगाने का श्रेय फ्रेडरिक विल्सन को जाता है जिनके नाम पर सेब की एक विल्सन प्रजाति भी है।
- हर्षिल में आलू की खेती की शुरुआत भी विल्सन ने की थी।
- स्थानीय निवासी विल्सन को पहाड़ी या राजा विल्सन कहते थे।
- विल्सन ने 1864 ई० को हर्षिल में विल्सन कॉटेज बनवाया था।
- हर्षिल एक छावनी शहर है भागीरथी एवं जलंधरी नदी का संगम हर्षिल में होता है, हर्षिल छिलके वाली राजमा दाल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
- हर्षिल क्षेत्र में भागीरथी तट पर 1818 ई० का बना लक्ष्मी नारायण मंदिर है।
उत्तरकाशी जनपद के आश्रम
- कपिल मुनि आश्रम उत्तरकाशी में स्थित है यहाँ यामुन शैली में बना कपिल मुनि का देवालय है।
- कपिल मुनि आश्रम के पास रामासिराईं पट्टी है।
- शिवानंद कुटीर आश्रम नेताला में 1991 ई० को स्थापित हुआ।
उत्तरकाशी जनपद प्रमुख संस्थान
- हिमालयन संग्रहालय उत्तरकाशी के (NIM) में स्थित है।
- तरूण पर्यावरण विज्ञान संस्थान डुंडा उत्तरकाशी में है।
- हिमालय पर्यावरण शिक्षा संस्थान टिहरी व उत्तरकाशी जनपद में 1995 से जैव विविधता संरक्षण का कार्य कर रही है।
अन्य महत्वपूर्ण स्थल
- ब्लैक पीक — इसे काला नाग चोटी भी कहा जाता है, यह चोटी गोविन्द वन्य जीव अभयारण्य तथा गोविन्द राष्ट्रीय उद्यान के बीच में स्थित है, यह एक ट्रैकिंग मार्ग भी है।
- सांकरी — उत्तरकाशी जनपद के सुन्दर गाँवों में से एक है, इस गाँव से अनेक स्थलों के लिए ट्रैकिंग मार्ग जाते हैं, इसलिए इसे स्थानीय भाषा में ट्रैकर्स का स्वर्ग भी कहा जाता है। यहाँ से हर की दून तथा केदारकांठा सबसे लोकप्रिय ट्रैकिंग मार्ग है।
उत्तरकाशी में गर्म एवं ठण्डे कुंड
- तप्त या सूर्यकुंड: यह यमुनोत्री में स्थित एक गर्म पानी का कुंड है।
- गंगनानी: यह गंगोत्री क्षेत्र में स्थित एक गर्म पानी का कुंड है। इस कुंड के पानी में गंधक की मात्रा पायी जाती है।
- देव कुंड: यह भागीरथी नदी के तट पर स्थित ठण्डे पानी का कुंड है।
- सप्तरिषि कुंड: यह उत्तरकाशी के यमुनोत्री क्षेत्र में स्थित है। इसे पुराणों में 'मलिंग सरोवर' कहा गया है।
उत्तरकाशी जनपद की झीलें/ताल
- नचिकेता ताल: यह उत्तरकाशी में स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस ताल का नाम उदालक के पुत्र नचिकेता के नाम पर पड़ा था।
- केदार ताल: यह गंगोत्री के पास थलैया पर्वत श्रृंखला पर स्थित है।
- फाचकंडी बयांताल: यह उत्तरकाशी जिले में स्थित है। यह एक गर्म पानी का ताल है, जिसका पानी हमेशा उबलता रहता है।
- सरताल: यह उत्तरकाशी जिले के बड़कोट क्षेत्र में स्थित है।
- रोही साड़ाताल एवं खिड़ाताल: ये दोनों ताल उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं।
- भराड़सर ताल: यह झनकटाल, सरूताल एवं लामाताताल के साथ उत्तरकाशी में स्थित है।
- मंगलाछु ताल: यह उत्तरकाशी जिले में है। इस ताल की विशेषता यह है कि ताली बजाने पर यहाँ बुलबुले उठते हैं।
- रुईसारा ताल, देवसाड़ी ताल व नरसिंह ताल: ये तीनों ताल उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं।
- मन्दाकिनी झरना: यह उत्तरकाशी के हर्षिल क्षेत्र में स्थित है।
- खराड़ी झरना: यह गंगनानी में स्थित एक सुरम्य प्रपात है।
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डोडीताल: * यह 6 कोनों वाला ताल है जो सुंदर मछलियों के लिए प्रसिद्ध है।
- इस ताल से भागीरथी की सहायक नदी अस्सी गंगा निकलती है।
- यहाँ पाई जाने वाली मछलियों का नाम हिमालयन ब्राउन ट्राउट प्रजाति पर रखा गया है।
- पौराणिक कथाओं के अनुसार, डोडीताल को भगवान गणेश की जन्मभूमि माना जाता है और यहाँ गणेश जी का एक मंदिर भी है।
- काणा ताल: यह डोडीताल के समीप ही स्थित है।

