रुद्रप्रयाग जनपद सम्पूर्ण जानकारी 2026 | इतिहास, भूगोल, झीलें, ग्लेशियर, मेले (UKSSSC / UKPSC Notes)
VIVEK DOBHAL
जनपद रुद्रप्रयाग
➤ रुद्रप्रयाग जनपद का इतिहास
महाभारत काल में रुद्रप्रयाग का नाम रुद्रावर्त था।
रुद्रप्रयाग का पुराना नाम पुनाड़ है।
1989 ई० में रुद्रप्रयाग एक तहसील बना था।
रुद्रप्रयाग जिले का गठन 16 सितम्बर 1997 ई० में किया गया (जिला वेबसाइट के अनुसार)।
रुद्रप्रयाग जिले का गठन तीन जिलों टिहरी, पौड़ी एवं चमोली की सीमाओं से काटकर बनाया गया है।
रुद्रप्रयाग नगर पंचायत 2002 में व नगरपालिका 2006 में बनी।
➤ रुद्रप्रयाग जनपद की भौगोलिक स्थिति
रुद्रप्रयाग उत्तराखण्ड राज्य के पंच प्रयागों में से एक है जो अलकनंदा एवं मंदाकिनी नदी के संगम पर स्थित है।
रुद्रप्रयाग जिले का क्षेत्रफल 1984 वर्ग किमी है।
रुद्रप्रयाग जिला से 4 जिलों की सीमाएं लगती हैं चमोली, पौड़ी, टिहरी व उत्तरकाशी।
रुद्रप्रयाग जिला राज्य का आंतरिक जिला है।
हाल ही में काकड़ागाड बर्ड वाचिंग नेचर ट्रेल का उद्घाटन राज्य के रुद्रप्रयाग जनपद में प्रमुख वन संरक्षक धनंजय मोहन द्वारा किया गया।
➤ रुद्रप्रयाग जनपद में ताल/सरोवर
गांधी सरोवर या शरवदी सरोवर या चौराबाड़ी सरोवर केदारनाथ मंदिर से कुछ दूरी पर है।
शरवदी सरोवर में 1948 ई० में गांधी जी की अस्थियां विसर्जित की गयी थी, इसलिए इसका नाम गांधी सरोवर पड़ा था।
देवरिया ताल ऊखीमठ के पास स्थित है, जिसे पुराणों में इन्द्र सरोवर कहा गया है। इस ताल में चौखम्बा शिखर का प्रतिबिम्ब दिखायी देता है।
बधाणी ताल रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है।
भेंकलताल रुद्रप्रयाग में अण्डाकार ताल है।
सुखदी ताल रुद्रप्रयाग में स्थित है।
वासुकी ताल टिहरी व रुद्रप्रयाग जिले में है, इस ताल का पानी लाल है।
वासुकी ताल नीले रंग के कमल के लिये प्रसिद्ध है।
दिदूरी ताल रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ में स्थित है।
बिसुणी ताल — ऊखीमठ विकासखण्ड के मनसूना-गड़गू पैदल मार्ग पर विसुणी ताल स्थित है।
➤ रुद्रप्रयाग जनपद में ग्लेशियर/कुंड/गुफा
केदारनाथ ग्लेशियर रुद्रप्रयाग जिले में है।
चौराबाड़ी ग्लेशियर रुद्रप्रयाग के केदारनाथ के समीप है।
गौरी कुंड गर्म पानी का कुंड रुद्रप्रयाग जिले में है।
नाग एवं ब्रह्मकुंड त्रिजुगीनारायण के समीप रुद्रप्रयाग में स्थित है।
सरस्वती कुंड त्रिजुगी नारायण मंदिर के पास है।
भोरी अमोला कुंड रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है।
हंस कुंड, उदक कुंड, रेतस कुंड व अमृत कुंड केदारनाथ में है।
ब्रह्म गुफा व भीम गुफा केदारनाथ में है।
मई 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केदारनाथ की ध्यान गुफा में साधना की थी।
भैरवझांप — केदारनाथ मंदिर के निकट एक शिला विद्यमान है, जिसे भैरवझांप कहा जाता है। माना जाता है कि इस शिला से स्वर्ग पहुँचने का एक मार्ग माना जाता है इसलिए इस शिला को स्वर्गारोहिनी शिला भी कहा जाता है। इसे भृगुपंथ तथा महापंथ नामों से भी जाना जाता है जबकि स्वर्गारोहिणी पर्वत उत्तरकाशी जनपद में स्थित है।
➤ रुद्रप्रयाग जनपद में वन/बुग्याल
मिश्रित वन खेती मॉडल रुद्रप्रयाग के जगत सिंह चौधरी जी ने तैयार किया।
जगत सिंह चौधरी जी का उपनाम जंगली है, इन्हें 2006 में आर्यभट्ट सम्मान से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय पक्षी संग्रहालय (बर्ड म्यूजियम) का निर्माण रुद्रप्रयाग जनपद में किया जा रहा है इसमें कई पक्षियों की प्रजाति को संरक्षित किया जायेगा।
राज्य में सबसे कम कृषि योग्य भूमि रुद्रप्रयाग जिले में है।
बरमी बुग्याल, चोपता बुग्याल और मनणी बुग्याल रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है।
अली बुग्याल जो चमोली व रुद्रप्रयाग जिले के बीच है।
कसनी खर्क बुग्याल मदमहेश्वर नाथ मंदिर के पास स्थित है।
दुगलविट्टा नामक पर्यटक स्थल रुद्रप्रयाग में स्थित है, यहाँ प्राकृतिक सौंदर्य का आनन्द लेने हेतु देश-विदेश से पर्यटकों का आगमन रहता है।
➤ रुद्रप्रयाग जनपद के प्रमुख मेले
भतूज मेला केदारनाथ मंदिर में रक्षाबंधन से एक दिन पहले लगता है, भतूज मेले को अन्नकूट दर्शन भी कहते हैं।
जाख मेला गुप्तकाशी (रुद्रप्रयाग) में वैसाख 2 गते को लगता है इसमें जाख का पश्वा जलते अंगारों पर नृत्य करता है।
स्वामी कार्तिकेय का मेला रुद्रप्रयाग में क्रोंच पर्वत पर लगता है, यह जून माह में लगता है।
कोटेश्वर महादेव मेला रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी के तट पर लगता है।
ओंकारेश्वर का मेला— यह मेला ऊखीमठ नामक स्थान पर लगता है।
वामन द्वादशी का मेला — यह मेला रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण मंदिर में लगता है।
अगस्त्य मुनि का मेला — यह रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि नामक स्थान पर अगस्त्य मुनि के नाम पर लगता है।
मक्कूमठ का मेला — यह रुद्रप्रयाग जनपद के मक्कू मठ गाँव में शीतकाल में तुंगनाथ के मंदिर के कपाट होने पर भगवान शिव की डोली मक्कूमठ के लिए चलती है तो इस अवधि में एक भव्य मेला लगता है।
साणेश्वर का मेला — अगस्त्यमुनि के सिला गाँव में स्थित साणेश्वर मंदिर में प्रति 12 वर्ष में यज्ञ होता है इस अवसर पर यहाँ भव्य मेला लगता है।
[ रुद्रप्रयाग जनपद के प्रसिद्ध मंदिर ]
पंच केदारों में से 3 केदार रुद्रप्रयाग जनपद में हैं - केदारनाथ, तुंगनाथ एवं मदमहेश्वर नाथ।
रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ में केदारनाथ समिति का मुख्यालय एवं रावल पुजारियों का आवास स्थल है
ऊखीमठ में ओंकारेश्वर शिव मंदिर है, इसका निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य ने किया था
कोटेश्वर महादेव गुफा मंदिर रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है
मुण्डकटिया गणेश का मंदिर सोनप्रयाग में स्थित है
बाणासुर गढ़ मंदिर गुप्तकाशी के समीप है
त्रियुगी नारायण मंदिर यज्ञ पर्वत की ढाल पर स्थित है
त्रियुगी नारायण मंदिर भगवान शिव एवं पार्वती का विवाह स्थल है
राज्य में दो जगह विश्वनाथ मंदिर हैं — उत्तरकाशी और गुप्तकाशी
कार्तिक स्वामी मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है
माँ हरियाली देवी मंदिर — नगरासू डांडाखाल मार्ग पर स्थित जसौली गाँव का सिद्धपीठ श्री हरियाली देवी के नाम से प्रसिद्ध है। हरियाली कांठा में देवी का स्वयंभू लिंग है। हरियाली कांठा में वर्ष में दो बार रक्षाबंधन एवं दीपावली में देवी के दर्शन-पूजन के लिए यात्राएं होती हैं और यहाँ पर भोग के रूप में देवी को खीर चढ़ाई जाती है।
नाला का बौद्ध स्तूप रुद्रप्रयाग में स्थित है
माँ मठियाणा देवी मंदिर — रुद्रप्रयाग जनपद के तिलवाड़ा मोटरमार्ग पर भरदार पट्टी में माता मठियाणा देवी का मंदिर है, यहां नवरात्रि में प्रतिवर्ष मेला लगता है
अगस्त्यमुनि मंदाकिनी एवं धूलगाड़ नदी के संगम पर स्थित है यहां ऋषि अगस्त्यमुनि ने तपस्या की थी
अगस्तेश्वर महादेव मंदिर अगस्त्यमुनि में है जो ऋषि अगस्त्यमुनि को समर्पित है
रुद्रप्रयाग के सोनप्रयाग में बासुकी एवं मंदाकिनी नदी का संगम होता है यहां कैलाश मंदिर भी है
अर्द्धनारेश्वर मंदिर व मणिकार्निक कुंड गुप्तकाशी में है
नारायण कोटी का मूर्तिमय मंदिर — पूर्व समय में इस मंदिर समूह में 360 बड़े और छोटे मंदिर स्थित थे जिस कारण इस परिसर का नाम नारायण कोटी पड़ा, यह मंदिर रुद्रप्रयाग जनपद में गुप्तकाशी के निकट स्थित है।
उमरा-नारायण मंदिर — रुद्रप्रयाग से 7 किमी. दूरी पर कोटेश्वर मार्ग पर यह मंदिर स्थित है। यहाँ पर उमरा का वृक्ष है इसी वृक्ष के नीचे नारायण ने तपस्या की थी इसलिए इस स्थान को उमरा-नारायण कहते हैं।
राजेश्वरी मंदिर — यह ऊखीमठ तहसील के कालीमठ पट्टी में रांसी गाँव से लगभग 14 किमी. की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर के गर्भगृह में पाषाण निर्मित मूर्ति है। इस मंदिर में प्रत्येक 24 साल में देवी का महायज्ञ होता है।
कालीमठ मंदिर रुद्रप्रयाग जनपद के कालीमठ नामक स्थान पर कालीमाता का शक्तिपीठ है जो कालीमठ नाम से प्रसिद्ध है। पुराणों में इस क्षेत्र का उल्लेख काली क्षेत्र के रूप में किया गया है।
[ रुद्रप्रयाग जनपद के प्रमुख पर्यटक स्थल ]
कालीमठ घाटी में मंदाकिनी एवं कालीगंगा का संगम होता है।
चोपता — उत्तराखंड का मिनी स्विट्जरलैंड कहा जाने वाला चोपता पर्यटक स्थल रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है जो समुद्र तल से 8556 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। हिल स्टेशन चोपता ट्रेकिंग, हाइकिंग, माउन्टेन साइकिल इन सभी एडवेन्चर के शौकीन लोगों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है
चोपता दुनिया में सबसे ऊँचाई पर स्थित शिव मंदिर तुंगनाथ के लिए प्रसिद्ध है।
चोपता, तुंगनाथ और चन्द्रशिला ट्रैक के लिए प्रसिद्ध है
कविल्ठा, कालीदास का जन्म स्थल
माना जाता है कि यहाँ महाकवि कालिदास का जन्म कविल्ठा ग्राम में हुआ था,
कविल्ठा में महाकवि कालिदास के जन्म स्थल पर एक भव्य स्मारक का निर्माण किया गया है।
जून 2005 में कविल्ठा में महाकवि कालिदास की भव्य प्रतिमा को स्थापित किया गया। वर्तमान में रुद्रप्रयाग जनपद का कविल्ठा गाँव केदार घाटी का एक साहित्यिक तीर्थ स्थल बन गया है।
कालीशिला — कालीशिला कालीमठ से ऊपर 5 किमी. की चढ़ाई पार करके है कालीमठ के श्रीमहालक्ष्मी मंदिर शिलालेख में 'कालीकाला शैल' नाम से लिखित कालीशिला, कालीगंगा के शीर्ष पर स्थित है जो एक सिद्ध क्षेत्र है।
कोटिमाहेश्वरी कालीमठ से 7 किमी. तथा कविल्ठा से 3 किमी. दूरी पर स्थित है जो कालीगंगा एवं मंडाणी के संगम पर बसा एक प्रसिद्ध तीर्थ है।
क्रोंच शिखर — कार्तिकेय स्वामी का मंदिर क्रोंच पर्वत शिखर पर स्थित है। यह रुद्रप्रयाग पोखरी मोटरमार्ग पर कनकचौरी नामक स्थान के निकट स्थित है। क्रोंच पर्वत से हिमालय की दूर-दूर तक फैली पर्वत श्रृंखलाओं के दृश्य दिखाई देते हैं।
[ रुद्रप्रयाग जनपद सम्बन्धी अन्य प्रमुख विवरण ]
रुद्रप्रयाग राज्य का सबसे कम उद्योग वाला जिला है
रुद्रप्रयाग जिले का पांडव नृत्य और बगड़वाल नृत्य प्रसिद्ध है
कालीमठ घाटी रुद्रप्रयाग में स्थित है
मक्कूमठ रुद्रप्रयाग में कत्यूरी शैली का बना हुआ है, इसका सम्बन्ध मार्कण्डेय ऋषि से था
तुंगनाथ रुद्रप्रयाग में सर्वाधिक ऊँचाई में स्थित देव मंदिर है
ऊखीमठ का प्राचीन नाम उषामठ है
दिव्य शिला एवं भैरव शिला केदारनाथ में है
पटौंगणिया पर्यटन विकास मेला रुद्रप्रयाग में लगता है
रुद्रप्रयाग जनपद में ऊखीमठ ब्लॉक के गडगू गाँव के ऊपर बिसुड़ी ताल एवं बिसुड़ी, टिंगरी, थौली, थजमानी नामक बुग्याल स्थित है
रुद्रप्रयाग के गुलाबराय मैदान में जिम कार्बेट ने नरभक्षी को मारा था।